मुहम्मदाबाद(गाजीपुर)। मुहम्मदाबाद के भाजपा विधायक स्व. कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की दिनदहाड़े हुई हत्या के आरोपी माफिया मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में गोली मार कर हत्या की खबर मिलते ही कहीं खुशी और कहीं गम का माहौल कायम है। विधायक मुख्तार अंसारी के समर्थक सबसे अधिक चिंतित हैं। घटना के बाद मुख्तार अंसारी की सुरक्षा को लेकर उनके अंदर भी भय का माहौल कायम है।
मुहम्मदाबाद की विधायक अलका राय के पति भाजपा विधायक स्व. कृष्णानंद राय एवं साथियों की भांवरकोल थाने के बसनिया चट्टी के पास की गई हत्या के 13 वर्ष बाद मुख्य आरोपी मुन्ना बजरंगी की हत्या किए जाने से गोड़ऊरवासी खुश हैं, क्योंकि घटनाक्रम को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपियों में मुन्ना बजरंगी शामिल था। इस घटना के बाद वह राष्ट्रीय स्तर के अपराधियों की श्रेणी में आ गया था। घटना के बाद वह काफी दिनों तक फरार रहा। उस पर सात लाख का इनाम घोषित था। एनकाउंटर के भय से 29 अक्तूबर 2009 में दिल्ली पुलिस से मिलीभगत कर गिरफ्तार हो गया। पिछले विधानसभा चुनाव में जौनपुर जिले की मड़ियाहूं सीट से निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन सफल नहीं हुआ। उसकी हत्या की खबर मिलते ही मऊ विधायक मुख्तार अंसारी के समर्थक जेल में बंद मुख्तार अंसारी की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए हैं। उन्हें आशंका सताने लगी है कि इस तरह की घटना उनके नेता के साथ भी घट सकती है। दूसरी तरफ स्व. कृष्णानंद राय के समर्थक काफी प्रसन्न हैं। उनका कहना है कि मुन्ना बजरंगी का अंत तो होना ही था, जो जैसा करता है ईश्वर उसके साथ वैसा करते हैं। उसकी हत्या नहीं होती तो भी स्व. राय हत्याकांड में उसे फांसी होनी निश्चित थी। अच्छा हुआ कि एक अपराधी कम हुआ। उसके निधन से उसके द्वारा दिए गये दर्द से पीड़ित परिवारों को काफी खुशी हुई होगी। कृष्णानंद राय के साथ मारे गये मुहम्मदाबाद के पूर्व ब्लाक प्रमुख श्यामा शंकर के पुत्र मनीष राय ने कहा की मुन्ना बजरंगी का यह हश्र तो होना ही था। हमें अदालत पर भरोसा था उसकी हत्या नहीं होती तो उसे फांसी होती।