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बिना कोडिंग के ही पोषाहार बोरी का किया जा रहा वितरण

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कासिमाबाद (गाजीपुर)। नौनिहालों को स्वस्थ आहार देने के लिए प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलने वाला पोषाहार वितरण में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जिलाधिकारी ने प्रत्येक परियोजना को गुप्त कोड डालकर वितरण करने का निर्देश दिया था। लेकिन इस आदेश का पालन कहीं होता नहीं दिख रहा है। बिना कोडिंग किए ही पोषाहार का वितरण निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए किया जा रहा है।
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इसके चलते बच्चों को मिलने वाला पोषाहार पशुओं का आहार बनकर रह गया है। मालूम हो कि कासिमाबाद बाल विकास परियोजना जिले की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना में कुल 289 आंगनबाड़ी एवं 40 मिनी आंगनबाड़ी कार्यरत है। छह आंगनबाड़ी का पद रिक्त चल रहा है। इन्हीं आंगनबाड़ियों के माध्यम से तीन माह से लेकर तीन वर्ष तक के बच्चों को केंद्र पर स्वास्थ आहार के रूप में पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है। इस पोषाहार में दूध के साथ सभी पौष्टिक पदार्थ समायोजित है, जिससे बच्चे को प्रोटीन और विटामिन उचित मात्रा में मिलता रहे। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति पंजीयन को आधार मानकर पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है। पोषाहार वितरण में लगातार शिकायतों को देखकर जिलाधिकारी ने एक वर्ष पूर्व ही अलग-अलग केंद्रों का गुप्त कोड बनाकर बोरियों पर कोडिंग करने का निर्देश दिया था। लेकिन एक वर्ष बाद भी जिलाधिकारी के निर्देशों का पालन किया जा रहा है। किसी भी बोरी पर किसी प्रकार का कोड अंकित नहीं मिलेगा। यही कारण है कि पोषाहार खुले रुप से बाजारों के साथ पशुओं के लिए आहार बना हुआ है। इस संबंध में बाल विकास परियोजना अधिकारी चिंता यादव से लगातार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन से बात नहीं हो पाई। इस संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी अमरनाथ मौर्य का ध्यान आकृष्ट कराया गया तो उन्होंने बताया कि गुप्त कोड का पालन हर परियोजना को करना है। अगर कोई परियोजना नहीं करती है तो सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। वितरण सौ प्रतिशत सुनिश्चित किया जाएगा।
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