गाजीपुर। जनपद के 19 राजकीय पशु अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन क्षेत्रों से संबंधित पशुपालक अपने मवेशियों का उपचार कैसे कराते होंगे। संबंधित क्षेत्रों में मवेशियों का उपचार राम भरोसे है।
जिस अस्पताल में डॉक्टर न हो, उसका क्या मतलब है। जाहिर सी बात है कि चिकित्सा व्यवस्था बेपटरी रहेगी। कुछ ऐसा ही हाल जनपद के 19 राजकीय पशु अस्पतालों का है। डॉक्टर न होने के कारण संबंधित क्षेत्र के पशुपालक अपने मवेशियों का उपचार अप्रशिक्षित प्राइवेट डॉक्टरों से कराने को विवश हैं। इसके कारण उन्हें जेब ढीली करनी पड़ती है। गलत उपचार के कारण मवेशियों की जान जाने की आशंका भी बनी रहती है। सरकार का दावा है कि पशुपालकों की सुविधाओं के लिए कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। लेकिन, चिकित्सकविहीन पशु अस्पताल सरकार के दावों की कलई खोल रहे हैं। जिले में कुल 52 राजकीय पशु अस्पताल हैं। जबकि केवल 33 डॉक्टरों की तैनाती है। जिले में मवेशियों की संख्या 9 लाख है। चार लाख पशुपालक हैं।