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आईना जब दिखाया तो चेहरा बदल गया

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दिलदारनगर। लोकबंधु राज नारायण की पुण्यतिथि पर सोमवार की रात डॉ. बालेश्वर शर्मा कटरा परिसर में अदब स्मृति समारोह में कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन किया गया। इस मौके पर कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया।
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कार्यक्रम की शुरुआत संचालक शकील मोइन ने गंगा कविता से की। इसके बाद कवि जनार्दन ज्वाला ने ‘ऐसी जालिम ठंड की सूरत बदलनी चाहिए, हर गली और चौराहे पर अब आग जलनी चाहिए..’ तथा सुहैल उस्मानी ने ‘उसको बहुत गुरुर था अपने शबाब पर, आइना जब दिखाया तो चेहरा बदल गया..’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। कवि डॉ. अकील पैकर ने अपनी रचना ‘बेटियां हमारी शान हैं बेटियां हमारी जान है, और बेटी से उल्फत करना आका का फरमान है’ सुनाकर लोगों को सोचने पर विवश कर दिया। कवि मिथिलेश गहमरी ने ‘भारत माता पूछ रही है अच्छे दिन कब आएंगे’, खुर्शीद दिलदारनगरी ने शातिर मिजाज लोग मनाने लगे हैं जश्न, मासूम जिंदगी को कबीलों में बांटकर, गोरखपुर से आई सत्यम वदा ने हम एक हैं एक रहेंगे, यह बात जमाने को बताने में लगी हूं तथा हसन आजमी की गजल अपना चेहरा कोई कितना भी छिपाए, वक्त हर शख्स को आइना दिखा देता है, को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता गीत सम्राट बुद्धिनाथ मिश्र ने की। इसके अलावा मैकश आजमी, भालचंद्र त्रिपाठी, उपेंद्र पांडेय, नदीम खान, सुभाष यादव ने भी अपनी रचना प्रस्तुत की। इससे पहले लोकबंधु राजनारायण विचार पथ-एक के संपादक धीरेंद्रनाथ श्रीवास्तव एवं पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने मुख्य अतिथि पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति हेमंत श्रीवास्तव सहित कवि, शायरों और अन्य अतिथियों को स्मृति चिह्न, अंगवस्त्रम् एवं राजनारायणजी की किताब देकर सम्मनित किया। इस अवसर पर ओमप्रकाश श्रीवास्तव, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, सुरेंद्र पांडेय, मंटू राय, पुष्कर त्रिपाठी, गुलाम मजहर, मन्नू सिंह, रामाधार राय, सुरेश कश्यप, दिलीप जायसवाल, अमोघ सिंह, अश्विनी श्रीवास्तव, कौशल जायसवाल, रौशन, अमर, शकील आदि उपस्थित थे।
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