देवकली। ब्रह्म स्थल देवकली के परिसर में आयोजित हो रहे मानस सम्मेलन के दूसरे दिन संगीतमय प्रवचन करते हुए गाजीपुर से आए हुए नीरज शास्त्री ने कहा परम पिता परमेश्वर की कृपा से जीव को देव दुर्लभ शरीर मिला है। मानव जैसा कर्म करेगा उसका फल भुगतना पड़ेगा। जीव भौतिक सुखों के उपभोग के साथ आध्यात्मिक उत्कर्ष प्राप्त कर आवागमन के बंधन से मुक्त हो सकता है जो इस शरीर का परम लक्ष्य है। जीवन में सुख, शांति के लिए भक्ति ही एकमात्र सर्वोत्तम साधन है जो सत्संग एवं संत की कृपा से ही मिलती है। भदोही से आए हुए आचार्य रविंद्रनाथ पांडेय ने कहा कि जो दुनिया का दु:ख दूर करता है उसे श्रीराम कहते हैं। जो श्रीराम का दु:ख दूर करता है उसे हनुमान कहते हैं। हनुमान का संपूर्ण जीवन परोपकार के प्रति समर्पित रहा इस लिए पूज्य है। इस धराधाम पर अनेक शूरवीर, धनवान, बलवान आए और चले गए। श्रीराम, कृष्ण को भी जाना पड़ा लेकिन हनुमान अमर हैं। आज मानव सुधरना नहीं चाहता है। दूसरों को सुधारना चाहता है। रामसुधार पांडेय ने कहा कि 84 लाख योनियों में मानव सर्वश्रेष्ठ है। परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। पति, पत्नी, धन-दौलत सभी कर्म के अनुसार मिलते हैं। जैसा कर्म करेंगे उसका फल इसी मानव जीवन में भुगतना पड़ेगा। इसके अलावा रामचंद्राचार्य, रमाशंकर पांडेय आदि ने प्रवचन के माध्यम से मानव जीवन पर विस्तृत प्रकाश डाला। अध्यक्षता प्रभुनाथ पांडेय एवं संचालन अरविंदलाल श्रीवास्तव ने किया।