गाजीपुर। छठ महापर्व की शुरुआत रविवार को नहाय-खाय के साथ हो गई। इस मौके पर घरों में श्रद्धा के साथ लौकी की सब्जी तथा नए चावल का भात बनाकर व्रती महिलाओं ने खाया। व्रत करने वाली महिलाओं को पूरी तरह से समर्पण भाव में लाने के लिए साफ-सफाई का बहुत ध्यान दिया जाता है। इस पर्व के शुरू होते ही घरों में छठी मइया के पारंपरिक गीत भी गाए जा रहे हैं।
शहर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में डाला छठ पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। दीपावली के बाद से ही घर-घर में इसकी जोरदार तैयारी होने गी थी। सुबह से ही महिलाओं में डाला छठ के व्रत को लेकर जबरदस्त उत्साह बना हुआ था। पहले दिन नहाय खाय मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं को बाल धोकर नहाना पड़ता है। गंवई पंरपरा में इसका भी बहुत महत्व होता है। स्नान के बाद व्रती महिलाओं ने लौकी और भात खाकर पर्व मनाना शुरू कर दिया। व्रती महिलाओं के परिजन भी इसको लेकर व्यस्त रहे। मान्यता के अनुसार, लौकी-भात जहां आसानी से पच जाता है, वहीं इससे शुद्धता भी बनी रहती है। सभी घरों में इस परंपरा का निर्वहन पूरी आस्था और विश्वास के साथ किया जाता है। भांवरकोल संवाददाता ने बताया कि इसको लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का वातावरण है। दूरदराज रहने वाले लोगों के घर आने से काफी सद्भावपूर्ण वातावरण हो गया है। मुहम्मदाबाद संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के गंगा घाटों पर वेदी बनाए जाने तथा घरों में लौकी भात का सेवन कर नहाय खाय से इस पर्व की शुरुआत कर दी गई। इसी प्रकार जमानिया, जखनिया, सेवराई, कासिमाबाद, सैदपुर, बिरनो, जंगीपुर, करंडा, देवकली, सादात, मरदह आदि सभी स्थानों पर इस पर्व की पारंपरिक शुरुआत की गई।