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हृदय में होता है परमात्मा का साक्षात्कार

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मतसा(गाजीपुर)। पाक्षिक रामचरित मानस सत्संग के तहत बेटाबर में प्रीतम देवी स्थान पर आयोजित श्रीराम कथा में संत भिखारी जी ने कहा कि मंदिर, तीर्थ स्थान इत्यादि श्रद्धा और विश्वास को पुष्ट करने के लिए है। लेकिन परमात्मा का साक्षात्कार अपने हृदय में ही होता है। परमात्मा का दर्शन लौकिक आंखों से नहीं, बल्कि अंतरचक्षु से होता है और यह चक्षु किसी संत की कृपा होने से जागृत होता है। कहा कि कलियुग में यज्ञ, जप, तप और पूजा का आश्रय लेकर भगवत साक्षात्कार संभव नहीं है क्योंकि मनुष्य की आयु ही अल्प है और साधन अपवित्र हैं। अत: भगवान की कथा और नाम का आश्रय ही कलियुगी मानव के लिए सुगम साधन है भक्ति के लिए। सत्संग में संत विश्राम दास, नगदू यादव, बुच्चा यादव, अवध बिहारी राय, शशि कुशवाहा, वशिष्ठ राय मौजूद रहे।
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