गाजीपुर। पिछले कई दिनों से गंगा के जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी है। पानी बढ़ने का रफ्तार बढ़ता ही जा रहा है। सोमवार को पांच सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गंगा के जलस्तर में वृद्धि का क्रम रात से बना रहा। अनुमान है कि जलस्तर बढ़ने की रफ्तार और बढ़ेगी। धीरे-धीरे बढ़ रही गंगा की लहरों को देख तटवर्ती इलाकों के लोगों की धुकधुकी बढ़ने लगी है। लोग बाढ़ की आशंका से सहमने लगे हैं।
जिले की सीमा से होकर गंगा सहित छोटी-बड़ी नौ नदियां गुजरती हैं। जिले का अधिकांश भू-भाग गंगा से घिरा हुआ है। कई गांवों की आबादी गंगा के किनारे ही आबाद है। यहां के लोगों के लिए गंगा ही आजीविका की साधन हैं, लेकिन बरसात शुरू होने पर गंगा के किनारे रहने वाले रहवासियों के ऊपर बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। पिछले कई दिनों से गंगा के जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी रहा। रविवार की जलस्तर में वृद्धि की रफ्तार काफी धीमी थी, लेकिन सोमवार की सुबह से अचानक रफ्तार बढ़ गई। केंद्रीय जल आयोग के स्थल प्रभारी उमाशंकर निषाद ने बताया कि वैसे तो कई दिनों से गंगा का जलस्तर से धीमी रफ्तार से वृद्धि हो रही थी, लेकिन यह रफ्तार सोमवार की सुबह छह बजे से बढ़ गई। सुबह 10 बजे 58.410, 12 बजे 58.510, एक बजे 58.560, दो बजे 58.610 और तीन बजे 58.660 सेंटीमीटर बढ़ोतरी दर्ज की गई। बताया कि अभी पानी बढ़ने की उम्मीद है। गंगा अभी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही है। उधर, गंगा की उफनाती लहरों को देखकर तटवर्ती इलाकों के लोगों की बेचैनी की बाढ़ की आशंका को लेकर बढ़ गई है। वह इस सोच में पड़ गए है कि अगर बाढ़ आई तो उन्हें घर छोड़ना पड़ेगा। मालूम हो कि दो वर्ष पहले जिले में बाढ़ आई थी। इस दौरान सैकड़ों गांव पानी से घिर गए थे। कई सड़कें पानी में बहने के साथ ही शहर की कई सड़कों पर गंगा का पानी आ गया था। लोगों को घरों में आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा था। शासन ने हेलिकाप्टर से पीड़ितों में राहत सामग्री का वितरण कराया था।