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रास्ते से रोड़ा हटाने के लिए काफी पहले बुना जा चुका था तनाबाना

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करंडा (गाजीपुर)। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता और पत्रकार राजेश मिश्र के हत्या की जमीन काफी पहले तैयार की जा चुकी थी। इसका तानाबाना एक आपराधिक गैंग महीनों पहले बुन चुका था। गैंग को सही वक्त का इंतजार था। ऐसा करने के पीछे अपराधियों के रास्ते में राजेश मिश्रा का रोड़ा बनना बताया जाता है। मजे की बात यह है कि हत्या के चार दिन बीतने के बाद भी ग्रामीणों में इस बात को लेकर चर्चा होने लगी है कि पुुलिस इन मामले में अभी तक हवा में तीर चला रही है।
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ब्राह्मणपुरा गांव के लोगों का कहना है कि आठ माह पूर्व चोचकपुुर बाजार में एक सर्राफा व्यापारी से रंगदारी मांगने के लिए घर पर कई राडंड हवाई फायरिंग करने के मामले में लोनेपुुर निवासी राजू यादव का नाम प्रकाश में आया था। व्यापारी संगठन के बढ़ते दबाव को देख पुुलिस ने आनन-फानन में दो लोगों को पकड़कर शातिर अपराधी का साथी बताने के साथ जेल भेज दिया था। लेकिन शातिर अपराधी पुुलिस की पकड़ से दूर रहा। मामला शांत होते ही जुलाई माह से फिर राजू यादव सक्रिय हुआ और व्यापारियों से वसूली करने का काम शुुरू कर दिया। इसके वसूली से परेशान व्यापारियों ने खबर प्रकाशित करने की गुुहार मृत पत्रकार से लगाई थी। ग्रामीणों ने बताया कि राजू यादव द्वारा व्यापारियों से वसूली करने की खबर प्रकाशित होने के बाद पुलिस सक्रिय हो गई। पुलिस के सक्रिय होने के बाद अवैध बालू खनन पर रोक लग गया। इसके राजू यादव ने मृत पत्रकार को सुधर जाने की धमकी देने के साथ टारगेट बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद बदमाश ने मृत पत्रकार के पड़ोसी के पास अपनी बैठकी शुरू कर दी। ग्रामीणों के अनुसार मृत पत्रकार का खास सहपाठी भी शातिर बदमाश और उनके पड़ोसी प्रदीप मिश्रा के संपर्क में आया। इसके बाद तीनों ने मिलकर आरएसएस कार्यकर्ता और पत्रकार को रास्ते का रोड़ा मानकर हटाने का तानाबान बुुनना शुुरू कर दिया। फिलहाल पुलिस इन तमाम बिंदुओं को एक-एक कर जोड़ने के साथ हत्यारों की तलाश में लगी हुई है।
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