गाजीपुर/मुहम्मदाबाद। आलू का रेट गिर जाने से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कोल्ड स्टोरेज के किराए से भी आलू का मूल्य कम हो जाने के कारण अधिकांश किसानों को अपना आलू कोल्ड स्टोरेज में ही छोड़ देना पड़ा है। किसान आलू की खेती करने के बाद उसकी लागत तक न निकलने से काफी चिंतित हैं।
मुहम्मदाबाद तहसील में आलू की बड़े पैमाने पर खेती होती है। क्षेत्र में दो हजार हेक्टेयर में इसकी खेती की जाती है। आलू के भंडारण के लिए इस तहसील क्षेत्र में लगभग डेढ़ दर्जन कोल्ड स्टोरेज बने हुए हैं। इसमें किसान अपने आलू का भंडारण करता है और अधिक मूल्य होने पर आलू को बेचता है। विगत कई सालों से आलूूूू का भंडारण करने वाले किसानों को काफी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। इस साल आलू का उत्पादन कम होने के कारण किसानों को आलू का भंडारण करने में लाभ की संभावना दिखाई दे रही थी। इसके चलते किसानों ने सीजन में आलू को न बेच कर उसे कोल्ड स्टोरेज में रख दिया था। दीपावली से पहले आलू 14 सौ से 15 सौ रुपये क्विंटल तक बिका। इससे किसानों को कुछ लाभ मिला, लेकिन जो लोग उस समय अपना आलू नहीं बेच पाए वह काफी नुकसान में हैं। दीपावली के बाद आलू का भाव लगातार गिरता चला गया और वर्तमान में आलू का भाव दो सौ रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। जबकि आलू की निकासी कराने में उन्हें 220 रुपये प्रति क्विंटल कोल्ड स्टोरेज का किराया देना पड़ रहा है। आलू निकालने में 20 रुपये प्रति क्विंटल किसानों को घर से लगाना पड़ रहा है। इसके चलते किसान आलू निकालने के बजाए उसे कोल्ड स्टोरेज में ही छोड़ देने में अपनी भलाई समझ रहे हैं। अभी मुहम्मदाबाद क्षेत्र के कोल्ड स्टोरेज में लगभग 40 हजार पैकेट यानी 20 हजार क्विंटल आलू पड़ा हुआ है। इसकी निकासी कोल्ड स्टोरेज मालिकों के लिए सिरदर्द बन गई है। स्थानीय आलू व्यापारी हकीम राईनी ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज के किराए से भी आलू का भाव कम हो जाने के कारण आलू उत्पादक किसानों के साथ-साथ कोल्ड स्टोरेज मालिकों एवं आलू व्यापारियों को भी बड़ी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।