मेजर के शव का लोग करते रहे इंतजार
मेजर विकास सिंह की ड्यूटी के दौरान खाई में गिरने से हुई थी मौत
अमर उजाला ब्यूरो
सुहवल। कुपवाडा के माछिल सेक्टर में 57 आरआर की अल्फा कंपनी में तैनात मेजर विकास सिंह की रविवार को ड्यूटी के दौरान खाई में गिरने से मौत हो गई। सोमवार को शहीद का पार्थिव शरीर देर रात उनके पैतृक गांव आने की सूचना के बाद जिलाधिकारी के बालाजी, पुलिस अधीक्षक डा. अरविंद चतुर्वेदी, जमानिया उपजिलाधिकारी रमेश मौर्या तथा सीओ जमानिया कुलभूषण ओझा के साथ ही पूरे सर्किल के पुलिस कर्मी मौजूद रहे। घटना की सूचना मिलने के बाद से ग्रामीण और परिजन पूरे दिन मेजर के शव आने का इंतजार करते रहे।
सोमवार को डीएम और एसपी ने शहीद मेजर विकास सिंह के पैतृक आवास पहुंचकर घंटों मौका मुआयना करने के बाद सीधे परिजनों से जानकारी हासिल की। सुरक्षा के बाबत आवश्यक दिशा -निर्देशन भी दिया गया। शहीद के पार्थिव शरीर के आने के बाद होने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर महिला, पुरुष आरक्षियों सहित विभिन्न थाना प्रभारियों की भी जगह-जगह तैनाती की गई है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न होने पाए। प्रशासन के अनुसार सेना के वाहन से शव आने के बाद शहीद के पार्थिव शरीर को पहले उनके पैतृक आवास ले जाया जाएगा, जहां केवल परिजनों सहित कुछ चुनिंदा लोगों को ही जाने की इजाजत होगी। उसके बाद घर के बगल में सड़क किनारे खलिहान में लगाए गए तंबू में शहीद का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद परिजनों के इच्छानुसार वहाँ से सेना के वाहन में पार्थिव शरीर को रख सीधे गाजीपुर स्थित श्मशान घाट ले जाया जाएगा। उन्हें सैनिक मातमी धून के बीच अंतिम सलामी दी जाएगी। इसके बाद उनका पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रशासन ने घर सहित मुख्य सड़क के अगल- बगल दर्जनों सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई दी है, जिन्हें मार्गों को साफ रखने के निर्देश दिए गए हैं। सोमवार को दोपहर करीब ग्यारह बजे शहीद मेजर विकास सिंह की पत्नी आंचल अपने दुधमुंही तीन माह की बेटी बृद्धि सिंह के साथ वाहन से ज्योहीं अपने ससुराल ताडीघाट पहुंची माहौल पूरी तरह से गमगीन हो गया। सभी लोगों में चीख -पुकार मच गई। मेजर विकास सिंह के शहीद होने के दूसरे दिन भी पूरे गाँव में मातम छाया रहा। साथ में बहुत सारे घरों के चूल्हे भी नहीं जले। जाति -मजहब से ऊपर उठ लोगों ने शहीद को याद किया। शहीद के पैतृक आवास से लेकर मुख्य मार्ग तक विभिन्न जगहों पर शहीद मेजर विकास सिंह की कटाउट एवं बैनर लगे थे। लोग उसे देख बरबस निहार रहे थे। शहीद के गांव ताड़ीघाट सहित मेदनीपुर, कालूपुर एवं अगल- बगल गाँव के चट्टी चौराहों की दुकानें पूरी तरह से शहीद की याद में बंद रहीं। लोग एक टक बस देख रहे थे कि कब हमारे बहादुर मेजर का पार्थिव शरीर गाँव पहुंचेगा और हम उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।