गाजीपुर। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से मुर्गियों का प्रबंधन विषयक तीन दिवसीय प्रशिक्षण केंद्र परिसर में आयोजित किया गया। इसमें केंद्र के सीनियर साइंटिस्ट एंड हेड ने 21 प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किया। प्रशिक्षण के दौरान नवयुवक और नवयुवतियां को मुर्गी पालन के माध्यम से स्वरोजगार के तौर पर अपनाकर घर पर ही आय सृजित करने की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
सीनियर साइंटिस्ट एडं हेड डॉ दिनेश सिंह ने कहा कि मुर्गी पालन के लिए अधिक धन खर्च की आवश्यकता नहीं होती। प्रशिक्षणार्थी मुर्गी पालन एवं प्रबंधन पर प्रशिक्षण प्राप्त कर आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकते हैं। पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. धर्मप्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि आज मुर्गी पालन वृहद तथा छोटे स्तर दोनों में ही उत्कृष्ट आमदनी का स्रोत है। जैसे छोटे स्तर घर के पिछवाड़े निकोबारी प्रजाति की मुर्गी का पालन पोषण ज्यादा अच्छे तरीके से किया जा सकता है। यह प्रजाति अन्य देशी मुर्गियों की तुलना में ज्यादा अंडे देती है। निकोबारी प्रजाति छोटे स्तर पर मुर्गी पालन के लिए अत्यंत लाभदायक है। वृहद स्तर पर मुर्गी पालन करना हो तो ब्रायलर या क्रायलर का पालन अधिक लाभदायक होता है। प्रशिक्षण के दौरान मुर्गियों के घर बनाने के तरीके के साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र के मुर्गी पालन यूनिट को प्रशिक्षणार्थियों ने देखा। डॉ. श्रीवास्तव ने भ्रमण के दौरान शव विच्छेदन के द्वारा अलग-अलग अंगों में होने वाले रोग के बारे में जानकारी दी। साथ ही रोगों के रोकथाम तथा पक्षी में होने वाले रोग एसाइटिस को शव विच्छेदन के द्वारा किसानों को बताया। प्रशिक्षण में 21 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया।