रेवतीपुर विकास खंड में बिना सत्यापन के ही कागजों पर इंडिया मार्का हैंडपंपों को रिबोर करने का खेल खेला गया है। 16 ग्राम पंचायतों में 35 स्थानों पर हैंडपंप रिबोर हुए ही नहीं, लेकिन विभाग ने कागजों में रिबोर कर धन का बंदरबांट कर लिया है। इन हैंडपंपों को रिबोर करने के साथ ही वहां प्लेटफार्म तथा नाली भी बनना था। इलाके में लोग पानी के लिए जूझ रहे हैं। गर्मी के बावजूद विभाग उदासीन है। हैंडपंप पानी तक नहीं उगल रहे हैं, लोगों को जल संकट का सामना न करना पड़ रहा है।
वित्तीय वर्ष 2015-16 में विभागीय रिपोर्ट पर नजर डालें तो 16 ग्राम पंचायतों में 35 हैंडपंपों के रिबोर के लिए करीब 12 लाख रुपये जारी किया गया था। जिससे इलाके के लोगों को गर्मी के दिन में जल संकट से मुक्ति मिल जाए। लेकिन उनकी आस धरी की धरी रह गई। लोगों का यहां तक आरोप है कि हैंडपंपों को रिबोर दिखाकर लाखों रुपये गटक लिए गए हैं। रहा सवाल हैंडपंपों के लगाने का तो एक हैंडपंप से दूसरे की दूरी करीब 200 मीटर होनी चाहिए, जिसका कम से कम 150 लोग फायदा उठा सके।
यह सरकार का मानक है, लेकिन मानकों की अनदेखी कर हैंडपंपों को लगाया जा रहा है। सरकारी आंकड़े के अनुसार इस समय पूरे ब्लॉक में करीब 6950 सरकारी हैंडपंपों हैं। एक तरफ जहां सरकार के धन की बंदरबांट हो रही है, वहीं एक तरफ इसके चलते भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो, वह दिन दूर नहीं जब लोगों को पीने के लिए पानी तक नहीं मिलेगा और जल संकट से जूझना होगा। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी राजकुमार गौतम का कहना है कि यह काफी गंभीर मामला है। इसकी निश्चित रूप से जांच कराई जाएगी। इसमें गड़बड़ी पाई गई तो, तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मामला की जांच कराकर सत्यता का पता लगाया जाएगा। दोषी के विरूद्घ अवश्य ही कार्रवाई होगी तथा संबंधित से रिकवरी भी की जाएगी। = राजकुमार, उपजिलाधिकारी, जमानिया