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लापरवाही के चलते सूख गए पौधे

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आनंदी त्रिपाठी
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मुहम्मदाबाद। पर्यावरण को दुरुस्त रखने के लिए सरकार की पौधरोपण जैसी महत्वाकांक्षी योजना लगाए गए वृक्षों के सही ढंग से रखरखाव न होने के कारण रंग लाती नहीं दिख रही है। मुहम्मदाबाद रेंज में पिछले वर्ष लगाए गए अधिकांश पौधे या तो सूख गए या छुट्टा पशुओं द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिए गए।
पर्यावरण को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों द्वारा मुहम्मदाबाद वन रेंज में पिछले दो वर्ष में एक लाख से अधिक पौधे लगाए गए। हर वर्ष बरसात के मौसम में सरकार की ओर से निर्धारित लक्ष्य के अनुसार पौधे लगाए जाते हैं। बरसात के सीजन में कुछ दिनों तक हरे भरे रहते हैं लेकिन उसके बाद रखरखाव के अभाव में पौधे सूख जाते हैं। इससे इलाके में हरियाली लाने का सपना साकार नहीं हो पा रहा है। वर्ष 2018-19 में वन रेंज मुहम्मदाबाद के तहत आने वाले विकास खंड मुहम्मदाबाद एवं भांवरकोल में लगभग एक लाख पांच हजार लक्ष्य के सापेक्ष वन विभाग की तरफ से 32 हजार दो सौ पौधे लगाए गए लेकिन ब्रिकगार्ड एवं ट्री-गार्ड के अभाव में छुट्टा पशुओं द्वारा पौधे क्षतिग्रस्त कर दिए गए। बहुत से स्थानों पर पानी की व्यवस्था न होने के कारण पौधे सूख गए। वन रेंज की ओर से पखनपुरा एवं गड़ेसर में लगाए गए पौधे हरे-भरे हैं लेकिन अन्य विभागों की ओर से अभियान के तहत पौधे जरूर लगा दिए गए लेकिन उनके रखरखाव की व्यवस्था नहीं की गई। इसके चलते, 70 प्रतिशत से अधिक पौधे सूख गए। वर्ष 2019-20 में प्रदेश में कुल 22 करोड पौधे लगाने का सरकार ने लक्ष्य रखा है। इसमें जिले में 41 लाख 50 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य है। इसमें वन विभाग की तरफ से नौ लाख 75 हजार पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है। वन रेंज मुहम्मदाबाद में इस वर्ष का लक्ष्य चार लाख 94 हजार 300 पौधे लगाने का है। इसमें 77 हजार 375 पौधे वन विभाग द्वारा लगाया जाएगा तथा 416925 पौधे अन्य विभागों की ओर से लगाए जाएंगे। पौधरोपण के लिए वन रेंज मुहम्मदाबाद में छह लाख पौधे विभिन्न नर्सरियों में तैयार किए गए हैं। अदिलाबाद की पौधशाला में चार लाख 50 हजार, रेंज कैंपस में 50 हजार एवं सुरतापुर पौधशाला में एक लाख 50 हजार पौधे तैयार किए गए हैं। इन नर्सरियों में यूकोलिप्टस, सागौन, शीशम, बेल, सहजन, कंजी, नीम, आम, जामुन आदि के पौधे तैयार हो गए हैं। प्रदेश सरकार की ओर से रोजगार सेवक एवं सफाई कर्मियों को वृक्ष अभिवावक बनाया गया है। वन विभाग के अलावा जिन विभागों में पौधरोपण का लक्ष्य दिया गया है। वहां पौधे पहुंचाने की जिम्मेदारी वृक्ष अभिभावक को दी गई है। वन विभाग के अलावा तहसील मुख्यालय, कोतवाली, विकासखंड कार्यालय, पशु हास्पिटल, सहकारी संस्थाओं एवं स्वास्थ्य केंद्रों को हरा-भरा बनाने के लिए पौधरोपण कराए गए। कुछ स्थानों पर इसकी रक्षा के लिए ट्री-गार्ड लगाए गए। पानी की व्यवस्था की गई वहां तो पौधे सही सलामत हैं लेकिन अधिकांश स्थानों पर उनकी देखभाल न होने से पौधे सूख गए।
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पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निर्माण में भांवरकोल विकासखंड में अधिकांश स्थानों पर बागीचे एवं पेड़ काट दिए गए। उनके स्थान पर कोई पौधा नहीं लगाया गया। इसके चलते, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ निर्जन एवं वीरान दिखाई दे रहा है। इसका प्रतिकूल प्रभाव पर्यावरण पर तो पड़ ही रहा है। मानसून के आने में भी देरी हो रही है।
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