कासिमाबाद। कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को बर्खास्त करने की मुख्यमंत्री की कार्रवाई को उनके विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने देर से ही सही उचित कदम बताया है। खुशी की वजह यह भी है कि उन्होंने विधानसभा क्षेत्र से लगातार दूरी बनाए रखी और ज्यादातर समय लखनऊ में ही रहे।
राजभर भाजपा से गठबंधन कर 2017 में जहूराबाद विधानसभा सीट से पहली बार विधायक निर्वाचित हुए थे। बाद में उन्हें मंत्री बनाया गया। इसके बाद मंत्री के प्रतिनिधि रामजी राजभर के भाई द्वारा राजस्व कर्मियों के साथ जून, 2017 में मारपीट के मामले में रामजी समेत उनके भाइयों पर एससी/एसटी एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज होने से खफा ओमप्रकाश ने तत्कालीन जिलाधिकारी संजय खत्री के खिलाफ मोर्चा खोला था। कहा था कि या तो जिलाधिकारी रहेंगे या मैं मंत्रिमंडल में रहूंगा। इसके बाद पिछड़ों के आरक्षण को लेकर सरकार पर दबाव बनाया। इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। बाद में लोकसभा चुनाव में गठबंधन न होने पर भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ उम्मीदवार उतार दिए। 17 मई को मऊ की सभा में राजभर ने भाजपा नेताओं को गालीगलौज करते हुए उन्हें जूता मारने की बात कही थी।