गाजीपुर। पूरे शहर के कूड़े -कचरे को राजमार्ग अंतर्गत हमीद सेतु पर फेंके जाने से आस-पास की आबादी घुट-घुट कर जी रही है। आलम यह है कि शहर से सटे सुखदेवपुर चौराहे के पास फेंके गए कूड़े की दुर्गंध से आसपास के चार गांव प्रभावित हैं। हालत यह है कि गाजीपुर-जमानिया राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह-जगह दोनों तरफ करीब एक किमी तक कूड़े के बड़े-बड़े अंबार लगे हुए हैं। इससे हमेशा सड़क और आबादी के बीच दुर्गंध फैला रहता है। राहगीर भी यहां से नाक पर रुमाल रख कर गुजरते हैं। खास बात यह है कि इन कूड़ों को जला कर छोड़ दिया जाता है, जिससे कई दिनों तक लगातार धुआं फैला रहता है। हमेशा बदबू और धुएं की वजह से ग्रामीण तरह-तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
गाजीपुर शहर से रोजाना करीब 25 मिट्रिक टन कूड़ा- कचरा निकलता है। इसमें से अधिकतर को शहर के बाहरी हिस्से में हमीद सेतु के पास ही फेंक दिया जाता है। इस कूड़े से निकल रही बदबू से सुखदेवपुर, झिंगुरपट्टी, गाजीपुर घाट गांव, रुई मंडी मुहल्ला आदि के लोग हमेशा परेशान रहते हैं। हवा चलने पर यह बदबू और फैल जाती है। इन गांवों के लोगों को दुर्गंध से दैनिक कार्यों को भी करने में खासी परेशानी हो रही है। खास तौर से भोजन करते समय इसकी बदबू को झेलना काफी कष्टदायक होता है। इसी बीच समय समय पर कूड़े को जला कर छोड़ दिया जाता है जिससे कई दिनों तक धुआं निकलता रहता है। यह धुआं जहा राहगीरों के लिए हादसे का कारण बन जाता है वहीं ग्रामीणों के लिए भी बीमारी का कारण बनता है। बुजुर्गों के लिए यह जानलेवा साबित हो जाता है। इस राजमार्ग पर हमेशा वाहनों का दबाव बना रहता है। राहगीर भी यहां से गुजरते समय बदबू और धुएं से परेशान होते रहते हैं। कूड़े के ढेर पर बंदर और पशु भी निंरतर सड़े अनाज और कचरे को खाते देखे जाते हैं। ग्रामीणों की मांग के बावजूद नगर पालिका और जिला प्रशासन इस दिशा में चुप्पी साधे हुए है।