गाजीपुर। बढ़ रहे कलिकाल के प्रकोप में सत्संग मिलना भी इतना आसन नहीं है। साधु-संतों और महापुरुषों की सेवा से ही सत्संग मिल सकता है। बड़ी तपस्या तथा पुण्य कर्मों के फलस्वरूप ही जीवन में गुरु का आगमन होता है। भगवान और गुरु में कोई भेद नहीं होता। जिसको गुरु ने अपना लिया उसका मोक्ष तय है। गुरु का दर्जा भगवान से भी ऊपर होता है। यह बातें मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से हंसयोग आश्रम में आयोजित सत्संग में महात्मा सुकर्मानंद जी ने कही।
उन्होंने कहा कि शुभ काम को करने के लिए समय नहीं रखना चाहिए। उसे तत्काल करना चाहिए। आज के परिवेश में सत्संग और धर्म से बढ़ कर कोई भी शुभ काम नहीं है। संसार रूपी भव सागर से पार पाना है तो नाम सुमिरन ही एकमात्र सहारा है। अगली सांस का भरोसा नहीं है। सच्चे मन से गुरु को अपनाकर सब कुछ उन पर छोड़ देना चाहिए। जिसके जीवन में सदगुरु आ गए उसका जीवन धन्य हो गया। कहा कि इस मानव योनि का मुख्य उद्देश्य सिर्फ मोक्ष प्राप्त करना ही है। इसे सुमिरन और भजन से ही सार्थक किया जा सकता है। संचालन कर रहे किशोर यादव ने बताया कि छह अप्रैल को राजमाता राजेश्वरी देवी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर आश्रम में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर अवधेश चौबे, लेखा, कन्हैया गुप्ता, दुखंती यादव, रामलखन, विपिन बिहारी आदि ने सराहनीय भूमिका निभाई। इस मौके पर दूरदराज से बड़ी संख्या में महिला, पुरुष आए। आश्रम में सतपालजी महाराज से जुड़े साहित्य, दवाएं और सामान आदि का स्टाल भी लगाया गया था।