सैदपुर। किसी भी समाज और संस्कृति के उन्नयन में नदियों की भूमिका अहम होती है। गंगा नदी का वैदिककालीन इतिहास है। भारतीय जनमानस की सहज आराध्य और विश्व के विभिन्न राष्ट्रों में रह रहे हिंदू जनमानस की आधार गंगा प्रदूषण और अतिक्रमण के चलते अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। ऐसे में नमामि गंगे के माध्यम से आमजन में गंगा सहित अन्य नदियों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ी है।
यह बातें रविवार को बासूपुर में नमामि गंगे प्रकल्प की ओर से आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार और सेवानिवृत हिंदी प्रवक्ता पं. शिवाकांत मिश्र ने कही। कार्यक्रम में प्रमुख चिकित्सक डा. मनोज श्रीवास्तव ने कहा विश्व की प्रमुख और सबसे प्राचीन सनातन सभ्यता गंगा के किनारे पुष्पित-पल्लवित हुई है। नमामि गंगे प्रकल्प के प्रदेश सह संयोजक डा. हेमंत गुप्ता ने कहा कि गंगा नदी नहीं बल्कि आस्था एवं श्रद्धा का आधार है। हिंदू जनमानस में केवल नाम लेने से जीवन चक्र के आवागमन से मुक्ति का माध्यम है। वहीं जीवन से मृत्यु तक विभिन्न कर्मकांडों में जुटी गंगा हाल में मानवीय चूक से प्रदूषित हुई। इस प्रकल्प के माध्यम से आमजन के साथ गंगा को उसके पूर्व स्वरूप में लाने का प्रयास किया जा रहा है। शहरों में विभिन्न कल कारखानों के प्रदूषण संसाधनों से गंगा की अविरलता प्रभावित हुई है। कार्यक्रम में डा. मनोज श्रीवास्तव, प्रो.अंशुल जैन, भुवन कठेरिया, उत्तमचंद्र शास्त्री, डा. विजय गुप्ता ने विचार व्यक्त किया। संगोष्ठी में कैलाश मिश्र, शशिशेखर पाठक, संजीव सिंह, अभिलाष पाठक, सतीश यादव, विनय यादव, दीपनारायण, उदयवीर यादव, एडवोकेट इरफान अजीज खान आदि उपस्थित थे। आगंतुकों का स्वागत और आभार संतोष कुमार मिश्र ने व्यक्त किया।