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डाक्टरों की टीम ने कालाजार पर दिए टिप्स

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गाजीपुर। जिले में कालाजार की रोकथाम के लिए सरकार की ओर से काफी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय के सभागार में झारखंड और लखनऊ से आई चिकित्सकों की टीम ने इस रोग के बारे में कई नई जानकारियां दी। इसके साथ ही रोकथाम के उपाय बताए और इसका प्रशिक्षण भी दिया। इस दौरान पूरे जनपद के चिकित्सक तथा लैब टेक्नीशियन मौजूद रहे।
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टीम के सदस्यों ने बताया कि अगर लगातार दो हफ्ते तक बुखार आ रहा हो तो उसे काफी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। भले ही उसे मलेरिया या एंटीबायोटिक दवाएं दी गई हो, लेकिन फीवर न रुके तो उसे कालाजार हो सकता है। इस रोग की रोकथाम के लिए समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव हर क्षेत्रों में अवश्य कराया जाए। जिससे इस रोग के विषाणु समाप्त हो सकें। कालाजार एक गंभीर तथा जानलेवा रोग है। इसमें पेट में सूजन, खून की कमी के साथ ही भूख न लगना होता है। चिकित्सकों को सलाह देते हुए बताया कि इस प्रकार के लक्षण मिलते ही मरीज को कालाजार की जांच के लिए लैब में भेजें। चमड़ी पर मौजूद कालाजार (पीकेडीएल) काफी गंभीर होता है। इसका इलाज कम से कम 12 सप्ताह तक कराना आवश्यक है। इस कोर्स को अवश्य पूरा किया जाना चाहिए। इस प्रकार के मरीज को चार हजार रुपये सहायता के रूप में दिया जाता है। बताया कि कालाजार में मरीज काफी कमजोर हो जाता है। सरकार की तरफ से ठीक होने पर भी उसे 500 रुपये की सहायता राशि भी दी जाती है। अगर आशा कार्यकत्री इस प्रकार के रोगी को चिन्हित करती हैं, तो उसे भी प्रोत्साहन राशि के रूप में 500 रुपये दिए जाएंगे। टीम में संयुक्त निदेशक - राज्य कार्यक्रम अधिकारी कालाजार डा. वीपी सिंह, झारखंड मानिटरिंग अफसर डा. पंकज कुमार, डा. अखिलेश पटेल, एसीएमओ एसपी पाल, डा. डीपी सिन्हा, वेदी यादव समेत कई चिकित्सक मौजूद रहे।
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