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गाजीपुर गौरव सम्मान से नवाजे गए रचनाकार रामवचन शास्त्री अंजोर

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गाजीपुर।
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साहित्य चेतना समाज का 33वां वार्षिक पुरस्कार वितरण एवं गाजीपुर गौरव सम्मान समारोह रविवार को माल गोदाम रोड स्थित एक पैलेस में चेतना महोत्सव के रूप में आयोजित किया गया। इस मौके पर प्रख्यात भोजपुरी रचनाकार रामवचन शास्त्री अंजोर को संस्था की ओर से गाजीपुर गौरव सम्मान से नवाजा गया। इस मौके पर सम्मान से अभिभूत रामवचन शास्त्री ने कहा कि सम्मान तो मिलते रहते हैं लेकिन अपने लोगों के बीच, अपनों की ओर से कोई सम्मान मिलता है तो वह बहुत महत्वपूर्ण होता है।
मुख्य अतिथि बलिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह ने कहा कि चेतना व्यक्ति का निर्माण करती है। चेतना जब विवेक के साथ जागृत होती है, तब एक जागरूक और सचेत समाज का निर्माण होता है। इस मौके पर बीएसडी पब्लिक स्कूल रेवतीपुर, गौरीशंकर पब्लिक स्कूल, न्यू होराइजन एकेडमी एवं डीड्रीम्स डांस क्लासेज के बाल कलाकारों ने आकर्षक एवं मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संस्था की तरफ से आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में चयनित प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि नगर पालिकाध्यक्ष सरिता अग्रवाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष विनोद अग्रवाल, संस्था के पूर्व प्रतिभागी एवं लखनऊ में खंड शिक्षाधिकारी अजय विक्रम सिंह, डा. सानंद सिंह, राजेश्वर सिंह, अमरनाथ राय, डा. गजाधर शर्मा गंगेश, शेख जैनूल आब्दीन, डा. विमला मिश्रा, उरुज फात्मा, किरनबाला राय, डा. कैलाशनाथ पांडेय, महेशप्रताप सिंह, सुरेंद्रनाथ भारती आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता बलिया से आए वरिष्ठ रचनाकार डा. जनार्दन राय तथा संचालन संजीव कुमार गुप्त ने किया। अंत में संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी, अध्यक्ष डा. रविनंदन वर्मा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
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रुद्रांश के हाथों का जादू देख झूमे लोग
गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज का 33वां वार्षिक पुरस्कार वितरण एवं गाजीपुर गौरव सम्मान समारोह में वैसे तो कई विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा दिखाई लेकिन जैसे ही चार वर्षीय रुद्रांश सिंह एवं 9 वर्षीय बालिका कुमारी स्नेहा शर्मा तबला और हारमोनियम के साथ मंच पर आई, लोगों की निगाहें उन पर पूरी तरह से टिक गई। स्नेहा द्वारा हारमोनियम पर धुन बजाते ही नन्हे रुद्रांश के छोटे-छोटे हाथ तबले पर ऐसे थिरकने लगे, जैसे कनि रुद्रांश का तबला से वर्षों पुराना संबंध हो। पायो जी मैने राम रतन धन पायो गीत पर रुद्रांश ने अपने नन्हीं हथेलियों से तबला पर संगीत का ऐसा जादू बिखेरा कि लोग वाह-वाह करते हुए झूमने लगे। लोग इस सोच में पड़ गए कि इस उम्र के बालक में संगीत की यह कला कैसे विद्यमान हो गई। कार्यक्रम प्रस्तुति के बाद जैसे ही रुद्रांश मंच से नीचे उतरा उसे गोद में लेने वालों की होड़ मच गई। दर्जनों लोगों ने नन्हें कलाकार के साथ सेल्फी ली।
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