गाजीपुर। पूर्वांचल में इस दफा लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरण हावी दिख रहे हैं। प्रत्याशियों को भी यह समझ में आ गया है कि जातीय समूहों को साधे बिना जीत नामुमकिन है। अब इसी रणनीति पर सबने तैयारियां तेज कर दी है। निर्वाचन आयोग की पाबंदी से खुलकर जातीय बैठकें भले नहीं की जा रही हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इन्हें साधने के लिए सभी दलों के नेता जुगत भिड़ा रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी मनोज सिन्हा जहां बिंद, दलित, यादव के साथ सवर्ण जातियों को जोड़ने की जुगत में है, वहीं सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार अफजाल अंसारी दलगत और जातिगत वोटों को सहेजने में जुटे हैं हैं। कांग्रेस उम्मीदवार अजीत प्रताप कुशवाहा पारंपरिक वोटों के आधार पर जीत का दावा कर रहे हैं, तो प्रसपा के संतोष यादव मुस्लिमों और अपने जातीय मतों के ध्रुवीकरण के प्रयास में डटे हुए हैं। माना जा रहा है कि इस बार चुनाव में यादव के बाद बिंद मतदाता निर्णायक की भूमिका में होंगे। बिंद मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में करने के लिए सदर विधायक संगीता बलवंत समेत कई नेताओं को लगाया गया है। पार्टियों के रणनीतिकार बताते हैं कि गाजीपुर सीट पर इस बार अलग स्थितियां हैं। पिछली बार वोटर खुलकर मोदी का गुणगान कर रहे थे लेकिन इस बार बिल्कुल शांत हैं। भाजपा और गठबंधन उम्मीदवारों के बीच सवर्ण, यादव के साथ बिंद मतों को लेकर शीतयुद्ध जैसी स्थिति है। जीत-हार की पटकथा लिखने वाले बिंद मतदाताओं की संख्या ढाई लाख तो यादवों की संख्या तीन लाख के करीब है। इसलिए इन दोनों समुदाय के वोटरों में अपनी पकड़ मजबूत करने की हर संभव कोशिश प्रत्याशी कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस और प्रसपा के उम्मीदवार कुशवाहा और मुस्लिम वोटरों को अपने-अपने पक्ष में करने की मशक्कत कर रहे हैं।