गाजीपुर। सदर कोतवाली क्षेत्र के गोराबाजार स्थित छोटका महादेवा गंगा घाट पर तीन छात्रों के डूबने की घटना के बाद मौके पर छात्रों के साथ ही आसपास के लोगों की भीड़ लग गई। गोताखोरों द्वारा गंगा में छात्रों की तलाश के दौरान लोगों की निगाहें लहरों पर टिकी रहीं। एक के बाद एक तीनों छात्रों के शवों को गोताखोरों ने पानी से बाहर निकाला।
बिहार के राजपुर थाना क्षेत्र के डेहरी गांव निवासी रामधनी का पुत्र गोपाल कुशवाहा (19), उसका चचेरा भाई नितीश कुशवाहा (20) और जमानिया कोतवाली क्षेत्र के बेटाबर निवासी बुधिराम कुशवाहा का पुत्र गोलू (18) अन्य छात्रों के साथ गोराबाजार में एक लाज में रह कर पढ़ाई करते थे। आज दोपहर बाद तीनों को न जाने क्या सूझा कि छोटका महादेवा गंगा घाट पर नहाने के लिए चले गए और डूब गए। जिस किसी को भी इस घटना का पता चला, उसके पैर गंगा घाट की तरफ बढ़ गए। कुछ ही देर में घाट पर आसपास के लोगों सहित दर्जनों लोग पहुंच गए। सभी की निगाहें गंगा की लहरों पर टिक गईं। गोताखोर जैसे पानी के अंदर जा रहे थे, लोग यह कयास लगाने लग रहे थे कि शायद इस बार डूबे छात्रों का पता चल गए, लेकिन जैसे ही गोताखोर खाली हाथ पानी से ऊपर आते थे, लोग निराश हो जा रहे थे। इसी बीच घटना के करीब आधा घंटा बाद सबसे पहले गोपाल का शव बरामद हुआ, जिसे गोताखारों ने बाहर निकाला। इसके बाद गोताखोर अन्य छात्रों की तलाश में जुट गए। दो घंटा के अंदर बारी-बारी से नितीश और गोलू के शव भी बरामद हो गए। साथियों के शव को देख मौजूद छात्र बिलखने लगे। आपस में बात करते हुए यह कहने लगे कि पता नहीं क्यों तीनों नहाने के लिए यहां आ गए। तैरना नहीं जानते थे तो गहरे पानी में जाने की क्या जरूरत थी। तीनों की किस्मत खराब थी, शायद ऊपर वाले को यही मंजूर था। बिलख रहे छात्र एक-दूसरे को दिलासा देते हुए मृतक छात्रों के साथ बिताए गए पल को याद करते हुए उनके व्यवहार की बातें करते रहे।