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कर्ज में डूबे 50 हजार किसान उबरे, हुए मजबूत

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गाजीपुर।
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कर्ज माफी योजना के तहत कर्ज में डूबे जिले के 50 हजार किसान उबरने के साथ मजबूत हुए हैं। इस योजना के तहत किसानों के एक लाख तक के कर्ज माफ किए गए हैं। साथ ही जिले में खेती योग्य भूमि का 20 हजार हेक्टेयर रकबा भी बढ़ा है। करीब 71.9 प्रतिशत किसान फसलों की सिंचाई के लिए निजी नलकूप पर आज भी निर्भर है। फसलों की सिंचाई को लेकर किसानों को आज भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जनपद में 2 लाख 53 हजार हेक्टेयर खेती योग्य भूमि है। इस पर करीब चार लाख छह हजार किसान विभिन्न फसलों की खेती कर अनाज और सब्जी का उत्पादन करते हैं। इसमें अधिकतर किसानों को खेती करने के लिए बैंकों से कृषि ऋण लेकर खेती किसानी करनी पड़ती है। प्रदेश में आई भाजपा सरकार ने किसानों को राहत पहुंचाने के लिए कर्जमाफी योजना लागू किया। इसके तहत, एक लाख रुपये तक ऋण लेने वाले किसानों की कर्जमाफी की गई। कर्जमाफी योजना के तहत जनपद के 50 हजार किसानों के एक लाख रुपये तक ऋण माफ किए गए। जनपद में मौजूद समय खेती योग्य भूमि का रकबा भी बढ़ा है। ऊसर और खराब भूमि को भूमि सुधार और भूमि संरक्षण के तरफ से उपचार कर खेती योग्य बनाया गया। प्रतिवर्ष 2 प्रतिशत की दर से खेती योग्य भूमि का रकबा बढ़ रहा है। वर्तमान समय में 20 हजार हेक्टेयर खेती योग्य भूमि का सुधार होने से रकबा में बढ़ोत्तरी भी हुई है लेकिन आज भी किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कृषि विभाग के मुताबिक नहरों से 23.92 प्रतिशत किसान फसलों की सिंचाई करते है। जबकि मात्र 4.18 प्रतिशत किसान ही फसलों की सिंचाई के लिए राजकीय नलकूप पर आश्रित है। सबसे अधिक 71.9 प्रतिशत किसान फसलों की सजिंचाई के लिए निजी नलकूपों का सहारा लेते है। कर्जमाफी से किसानों की स्थिति तो कुछ मजबूत हुई है और खेतीयोग्य भूमि का रकबा भी बढ़ा लेकिन सिंचाई की समस्या जस की तस आज भी बरकरार है।
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कर्जमाफी के तहत जनपद के 50 हजार किसानों के कर्ज माफ हुए हैं। प्रतिवर्ष के मुताबिक, खेती योग्य भूमि का रकबा भी बढ़ा है। कर्ज माफी का लाभ मिलने से जिले के किसान मजबूत हुए हैं। - मृत्युंजय सिंह, कृषि अधिकारी
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