फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आज भी जनमानस के बीच होती है कबीर और तुलसी की चर्चा

विज्ञापन
विज्ञापन
गाजीपुर। स्नातकोत्तर महाविद्यालय के टेरी सभागार में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रायोजित मदन मोहन मालवीय शिक्षक शिक्षण योजना के तहत आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला का समापन शुक्रवार की देर शाम हो गया। इस मौके पर केंद्रीय विश्वविद्यालय हैदराबाद के हिंदी विभाग के प्रो. गजेंद्र पाठक ने कहा कि आज भी जनमानस के बीच कबीर और तुलसी की चर्चा सहज रूप से होती है, क्योंकि दोनों ने ही अपने अपने ढंग से सामाजिक कुरीतियों पर अपने साहित्य के माध्यम से कुठाराघात किया है।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के विचारों में हिंदी साहित्य के भक्ति आंदोलन की महती छाप स्पष्ट दिखाई देती है। रामराज की परिकल्पना गांधी जी ने तुलसी साहित्य से ही लिया था और गांधी ने यह कभी दावा नहीं किया कि वे जो भी कर रहे है, वह पहली बार किया जा रहा है। आलोचकों की जहां तक बात है, आचार्य रामचंद्र शुक्ल और आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने भक्ति आंदोलन के साहित्यकारों को स्थापित करने में महती भूमिका अदा की है। कबीर के दोहे और कविताओं को गुरूवर रविंद्र नाथ ठाकुर ने अंग्रेजी में तर्जुमा कर कबीर के साहित्य को पश्चिमी देशों तक पहुंचाया। ब्याख्या के बाद प्रो. पाठक ने महाविद्यालय परिसर के अवलोकन के क्रम में केंद्रीय पुस्तकालय, वोटेनिकल गार्डेन, गौशाला, कुक्कुट पालन केंद्र आदि का भ्रमण किया। इस अवसर पर आयोजन सचिव डा. समर बहादुर सिंह, डा. धर्मनारायण मिश्र, डा. बद्रीनाथ सिंह, डा. श्रीकांत पांडेय, डा. नंदिता श्रीवास्तव, डा. सुनील कुमार, डा. कुलदीप पांडेय, डा. शिवेश राय, डा. शिखा, डा. राहुल, ऊषा भारती, डा. संजय सुमन, डा. समरेंद्रनाथ मिश्र, मीडिया प्रभारी अमितेश सिंह आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता प्रसिद्ध समालोचक डा. पीएन सिंह ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें