कासिमाबाद। जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल खत्म हो गई है। ऐसे में नौनिहालों को मिलने वाला पोषाहार बंटना शुरू हो गया है। लेकिन पोषाहार पशु आहार के रूप में इन दिनों खुलेआम बिक रहा है। आलम यह है कि पोषाहार की बोरियां खरीदकर लोग धड़ल्ले से साइकिल और अपनी बाइक से घर ले जा रहे हैं। इन बोरियों पर अभी भी कोई कोडिंग नहीं है।
पूरे प्रदेश में अपनी विभिन्न मांगों के साथ आंगनबाड़ी संघ ने करीब दो माह तक कलम बंद और काम बंद हड़ताल किया। लेकिन बीते दिनों हड़ताल खत्म हो गई। इसके बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपना पोषाहार उठाने में जुट गई हैं। पोषाहार का उठान होते ही इसकी बिक्री भी शुरू हो गई है। बाजारों में खुलेआम पोषाहार बेचा जा रहा है। जिलाधिकारी ने गलत ढंग से पोषाहार की बिक्री रोकने के लिए परियोजना पर अलग से कोडिंग करने का सख्त निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद भी परियोजना अधिकारी किसी भी बोरी पर न तो कोडिंग कर रहे हैं और न ही इसके दुरुपयोग को रोकने की कठोर पहल की जा रही है। हालत यह बन गई है कि यह आंगनबाड़ियां बच्चों को मिलने वाला पोषाहार 200 से 300 रुपये में खुलेआम पशुपालकों को बेच रही है। इसका नजारा प्रतिदिन देखने को मिल रहा है। कासिमाबाद चौक से होकर अधिकांश पशुपालक साइकिल अथवा बाइक से पोषाहार ले जा रहे हैं। बच्चों को मिलने वाला पोषाहार पशुओं का आहार बन गया है। क्षेत्रीय जनता धीरे-धीरे मुखर हो रही है ओर इसकी जांच कराकर सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग कर रही है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अमर नाथ मौर्या ने कहा कि शिकायत गंभीर है इस पर कार्रवाई की जाएगी। बोरियों पर कोडिंग करने का आदेश दिया गया है। इसमें शिथिलता बरती गई है, इसकी जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी।