मुहम्मदाबाद (गाजीपुर)। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी किसानों की कर्ज माफी योजना में प्रदेश सरकार द्वारा चिह्नित किए गए किसानों का कर्ज माफ करने के लिए बनाए गए पोर्टल में किसानों की डाटा फीडिंग सरकार की तरफ से तय तिथि शनिवार को समाप्त हो गई। अंतिम दिन भी सरवर डाउन रहने से 50 प्रतिशत किसानों की फीडिंग नहीं हो सकी।
विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में सरकार में आने पर प्रदेश के सभी किसानों का कर्ज माफ करने एवं शून्य ब्याज पर किसानों को फसली ऋृण देने का वादा किया था। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट मीटिंग में किसानों का कर्ज माफ करने का एलान कर दिया गया लेकिन चार महीने की कवायद के बाद प्रदेश सरकार ने ऋृण लेने वाले किसानों की सूची बनवाई उसके बाद इन किसानों को दो भागों में बांटकर सूची ए में उन किसानों को रखा गया जो एक वर्ष पूर्व कर्ज लिए थे। 31 मार्च 2016 को उनके ऊपर लगे कर्ज को 31 मार्च 2017 तक अदा न किया गया। उन किसानों की सूची ए में रखा गया। एनआईसी के पोर्टल पर उनके नाम दर्ज कर उनका आधार नंबर, मोबाइल नंबर, पिता का नाम एवं उनके खतौनी का गाटा संख्या पोर्टल पर डाटा फीडिंग करने के लिए बैंकों को 22 जुलाई तक की समय सीमा दी गई। सरवर डाउन रहने से लगभग 50 प्रतिशत से अधिक किसानों का डाटा फीडिंग नहीं हो सकी। दूसरी तरफ सूची बी में रखे गए किसानों का कर्ज माफी के संबंध में सरकार द्वारा कोई आदेश न निर्गत करने से किसानों में प्रदेश सरकार के प्रति जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। किसानों का कहना है कि भाजपा ने चुनाव के दौरान सभी किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी लेकिन वर्ष 2016-17 में कर्ज लेने वाले किसानों को कर्ज माफी योजना से बाहर करके किसानों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया गया है। इसका खामियाजा सरकार को अगले चुनाव में भुगतना पड़ेगा। किसान संघ के नेता पूर्व ब्लाक प्रमुख रामायण सिंह यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा कर्ज माफी के नाम पर किसानों के साथ धोखा किया गया है। सभी किसानों की कर्ज माफी के लिए किसान संघ आंदोलन करेगा।