गाजीपुर। करीब एक सप्ताह से आसमान से आग बरस रही है। इससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है। तेज धूप के बीच तपन से लोगों को एक सेकेंड भी चैन नहीं मिल पा रहा है। परेशान हाल लोगों के मुंह से बार-बार यह बात निकल रही है कि ऊफ ये गर्मी, कैसे मिलेगी इससे राहत। मौसम की मार से अब तक किसी को भगवान इंद्र की मेहरबानी का इंतजार है।
पिछले करीब दो सप्ताह से मौसम की बेरहरमी से हर कोई परेशान और बेहाल है। न घर में चैन मिल रहा है और न ही घर के बाहर। लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिरकार इस बेतहाशा उमस और गर्मी से कैसे राहत मिलेगी। बीच-बीच में धूप और बदली का खेल जरूर चल रहा है, लेकिन राहत की बारिश नहीं हो रही है। बीते रविवार की देर रात हल्की बूंदाबांदी हुई, जिससे मौसम में हल्की नमी आ गई, लेकिन लोगों को पर्याप्त राहत नहीं मिली। सोमवार की सुबह आठ बजे से धूप का तेज प्रभाव शुरू हो गया। जैसे-जैसे दिन ढलता गया, वैसे-वैसे तपन में भी इजाफा होता गया। धूप के बीच मार्गों पर आवागमन करने वाले पूरी तरह से पसीने से तर-बतर होते हुए गर्मी से उलझन के बीच परेशान हाल रहे। धूप के बीच हिम्मत के जवाब देने पर लोग पेड़ों और दुकानों के टीनशेडों तथा मकानों के बारजा के नीचे छांव में आराम करते रहे। कूलर-पंखा के शरण में रहने पर भी घबराहट के बीच शरीर से पसीना टपकता रहा। न घर के अंदर राहत मिल रही है और न ही बाहर। राहत के लिए गंगा नदी के साथ ही गांव के पोखरों और तालाबों में पूरे दिन बच्चे पानी में उछलकूद कर रहे हैं। परेशानियों के बीच लोगों के मुंह से यह बात निकलती रही कि उफ ये गर्मी, कैसे मिलेगी इससे राहत। कुल मिलाकर अब मौसम का मिजाज लोगों की समझ से परे होने लगा है। लाख जतन के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। गर्मी से राहत के लिए अब लोगों को भगवान इंद्र की मेहरबानी का इंतजार है।