फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अधिवक्ताओं ने कार्य का बहिष्कार कर मार्ग किया जाम

विज्ञापन
विज्ञापन
मुहम्मदाबाद (गाजीपुर)। अधिवक्ता पर हमले की घटना को लेकर गुरुवार को अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर गुरुवार को अधिवक्ता दीवानी न्यायालय गेट के सामने बलिया-गाजीपुर मार्ग जाम कर दिए। एसडीएम की भी गाड़ी निकलने नहीं दिया। मौके पर पहुंच कर कोतवाल विमल कुमार मिश्र ने अधिवक्ताओं को समझाने की कोशिश की।
विज्ञापन

अधिवक्ताओं का कहना था कि अधिवक्ता अनिल सिंह की गोली मार कर हत्या की कोशिश में पकड़े गए। अन्य चार अभियुक्तों को कोतवाली से छोड़ दिया गया। इसमें कोतवाल विमल मिश्र की भूमिका संदिग्ध है। लिहाजा उन्हें तत्काल हटाया जाए और छोड़े गए बदमाशों को गिरफ्तार किया जाए। आखिर में प्रभारी सीओ डॉ.कृष्णकांत सरोज पहुंचे, उन्होंने अधिवक्ताओं का पत्रक लिया और उनकी मांगों के तहत कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद अधिवक्ता दोपहर करीब एक बजे जाम खत्म किए। इस मौके पर प्यारेलाल अग्रवाल, कमला राय, जयप्रकाश राय, मंगला प्रधान, कृष्ण मुरारी राय, चंद्रप्रकाश राय, सच्चिदानंद राय, आलोक राय, प्रेमशंकर राय, मुन्ना यादव, समता बिंद, अरुण श्रीवास्तव आदि मौजूद थे। मालूम हो कि बुधवार की शाम करीब सवा पांच बजे अधिवक्ता अनिल सिंह पर रजिस्ट्री ऑफिस के गेट पर सरेआम गोली दागी गई थी। संयोग रहा कि वह बाल-बाल बच गए थे। पुलिस की फौरी कार्रवाई में मौके पर हिम्मत सिंह समेत हमलावर पक्ष के छह लोग पकड़े गए थे। घटना में प्रयुक्त तमंचा तथा स्कार्पियो भी जब्त हुई थी। हमलावरों के शेष साथी अपने वाहनों से भाग निकले थे। कोतवाली में अनिल की तहरीर पर पुलिस ने हिम्मत सिंह तथा कासिमाबाद थाने के महुवारी नगवा निवासी रामजी सिंह के खिलाफ नामजद केस दर्ज कर गिरफ्तार कर ली शेष चार को छोड़ दी थी। उनमें कासिमाबाद थाने के मुहम्मदपुर सिधागर का भरत सिंह, मऊ भिटी का आलोक सिंह, अभिजीत सिंह तरवां कोपागंज मऊ एवं अभिनव सिंह तुलसी जमालपुर थाना कोपागंज जिला मऊ का रहने वाला बताया गया था। कासिमाबाद थाने के मिर्जापुर गांव के रहने वाले अधिवक्ता अनिल सिंह का आरोप है कि वह सभी गांव के विवादित भूखंड के उनके हिस्से की रजिस्ट्री करने आए थे। इस संबंध में प्रभारी सीओ डॉ. कृष्णकांत सरोज ने कहा कि अधिवक्ता अनिल सिंह ने शुरू में दो लोगों को नामजद किया था। लिहाजा दो नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि शेष को छोड़ दिया गया था। ऐसे में पुलिस पर उन्हें छोड़ने का आरोप बेबुनियाद है। इस मामले में दूसरी तहरीर मिली है। उस आधार पर विवेचना कर आगे की कार्रवाई होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें