सुहवल। हमीद सेतु पुल की क्षमता 30 से 35 टन भार वाले वाहनों की है, लेकिन सेतु से वर्तमान समय में 50 से लेकर 100 टन भार क्षमता वाले वाहनों का आवागमन हो रहा। जिसका खामियाजा सबके सामने है। इससे पहले भी क्षमता से अधिक भार के वाहनों के संचालन की वजह से इसी स्थान पर रोलर बेयरिंग धंसी थी, जिससे कई दिनों तक आवागमन करने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। उधर स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस प्रशासन ओवरलोड वाहनों के संचालन पर सख्ती से रोक नहीं लगा पा रहा है। अधिकारियों द्वारा निर्देश जरूर दिया जा रहा है, लेकिन पुलिस अपने फायदे के लिए ओवरलोड वाहनों को सेतु से फर्राटा भरने के लिए हरी झंडी दे रही है। ओवरलोड वाहनों पर प्रतिबंध लगाना पूरी तरह से परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन ऐसे वाहनों का संचालन पर रोक लगाने के नाम पर कोरम पूरा कर रहा है। अगर समय रहते आलाधिकारी एवं संबंधित विभाग नहीं चेता तो सेतु कभी भी ध्वस्त हो सकता है और सैकड़ों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट सकता है। ओवरलोड वाहनों के संचालन से सेतु धंसने का खामियाजा अन्य लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
सुहवल। करोड़ों से बने हमीद सेतु की आधारशिला करीब तीन दशक पूर्व 1975 में रखी गई थी। करीब दस वर्षों के इंतजार के बाद काम पूरा होने पर 1985 में सेतु चालू हो सका। 12 पिलरों पर आधारित यह पुल 11 सौ मीटर लंबा है, जो 26 ज्वाइंटरों 52 रोलर बेयरिंग पर टिका है। यह सेतु मात्र जनपद ही नहीं, पड़ोसी राज्य बिहार सहित पूरे पूर्वांचल को जोड़ता है, जिससे प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन 24 घंटा आवागमन होता रहता है।
सुहवल। ओवरलोड वाहनों के संचालन की वजह से बार-बार हमीद सेतु पर दरार पड़ रही है। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने जनप्रतिनिधियों एवं आलाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि भरौली-बक्सर पुल के क्षतिग्रस्त होने के चलते कई वर्षों से उस पर वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके साथ ही जमानिया के पास नवनिर्मित गंगा पुल एवं चंदौली-सैदपुर पुल बड़े वाहनों के लिए खोल दिया जाता तो हमीद सेतु पर वाहनों का दबाव काफी हो जाता। इससे बार-बार सेतु के धंसने की समस्या से छुटकारा मिल जाता है।