बैठक करते राज्य सूचना आयुक्त पारसनाथ गुप्ता।
गाजीपुर। राज्य सूचना आयुक्त पारसनाथ गुप्ता आरटीआई से संबंधित समीक्षा बैठक ली और लंबित मामलों की जांच-पड़ताल की। ब्लाक स्तर ग्राम पंचायत अधिकारी तथा खंड विकास अधिकारी की बैठक में उन्होंने आरटीआई से संबंधी विभिन्न टिप्स दिए। कहा कि सूचना मांगने वाले की बात स्पष्ट है, तो उसे एक हफ्ते के अंदर सूचना उपलब्ध करा दी जाए। इसके साथ ही 30 दिन के भीतर इससे उच्चाधिकारियों को अवगत कराएं। जिले स्तर पर तथा ब्लाक स्तर पर एक जनसूचना अधिकारी नियुक्त किया जाए। इसके लिए कार्यालय के जरिए सब कुछ दुरुस्त रखने को कहा।
ब्लाकवार समीक्षा में मरदह में सबसे अधिक दस मामले लंबित पाए गए। जबकि सदर सहित तीन ब्लाकों में केवल एक ही मामला लंबित मिला। बैठक में राज्य सूचना आयुक्त ने बताया कि सबसे ज्यादा प्रकरण ग्राम पंचायत का होता है। सूचना देने वाला पटल सहायक कहता है कि पहले जो कार्यरत थे वह चले गए हमें जानकारी नहीं है। इस संबंध में सूचना आयुक्त ने सख्त निर्देश दिया कि संबंधित पत्रावली जिस कर्मचारी के पास होगी उसी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि जिस भी कर्मचारी के पास संबंधित अभिलेख उपलब्ध होगा उसको जवाब देना होगा। कोई भी सूचना मांगने वाले व्यक्ति को निर्धारित अवधि के अंदर जवाब न उपलब्ध कराने पर उसके ऊपर जुर्माना के तौर पर अर्थदंड लगाने की प्रक्रिया है और एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है। सूचना मांगने वाले आवेदन कर्ता को एक सप्ताह के अंदर इस बात की भी सूचना देनी होगी कि उक्त सूचना देने में असमर्थ हूं या इस विभाग से संबंधित नहीं है। सूचना मांगने पर सूचना न देने वाले पर धारा-20 के अंतर्गत आपत्ति मानी जाएगी और कठोर कार्रवाई का प्राविधान भी है। उन्होंने ने सभी ग्राम पंचायत एवं ब्लाक स्तर के अधिकारी को निर्देशित किया कि ब्लाक स्तर पर जन सूचना का बोर्ड अवश्य लगाएं और जो भी कर्मचारी जनसूचना का कार्य देख रहा हो उसका प्रथम दायित्व है कि जिसने सूचना मांगा और जिसको सूचना चाहिए उसका एक रजिस्टर जरूर बनाया जाय। जिला विकास अधिकारी को निर्देश दिया कि जन सूचना के प्रकरण में युद्ध स्तर पर कार्रवाई किया जाय। सूचना देने वाली तिथि, समय एवं पत्रावली का विशेष ध्यान दें। वर्तमान में मरदह विकास खंड में कुल दस मामले, जखनिया में छह, सैदपुर में पांच, सदर में एक, जमानिया में एक, कासिमाबाद में पांच समेत अन्य ब्लाकों में सूचना के अधिकार के तहत मामले लंबित हैं।