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धर्म के नाम पर देश को बांटने का नहीं होना चाहिए काम

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कासिमाबाद(गाजीपुर)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजान ने कहा कि इंसान और इंसानियत का देश बनाओ। धर्म के नाम पर देश को बांटने का काम नहीं होना चाहिए। आज पूरे देश में राष्ट्रवाद का मखौल उड़ाया जा रहा है। यह बातें उन्होंने शनिवार को पुरानी बाजार में आयोजित पार्टी के 23वें जिला सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि कही।
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उन्होंने कहा कि आज देश में मोदी और योगी मिलकर नए-नए नारे पैदा कर रहे हैं। सब को आपस में लड़ाने का काम किया जा रहा है। इसके लिए पूरी तरह से आरएसएस जिम्मेदार है। देश के गरीब आज भी खाने के लिए मोहताज हैं। उनके लिए सरकार कोई काम नहीं कर रही है। भ्रष्टाचार चरम सीमा पर बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि बोलो बम, तौलो कम के नारे पर यह सरकार काम कर रही है। गाजीपुर, बलिया के इतिहास को दोहराते हुए कहा कि 1942 में यहां की जनता ने अंग्रेजों को ललकारते हुए तिरंगा लहराया था। देश नेताओं से नहीं नीतियों से चलता है। कश्मीर, उत्तर पूर्वी राज्यों में उथल-पुथल मची हुई है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है। आज हमारी सभी सीमाओं के राज्य को अस्थिर कर दिया गया है। सेना प्रमुख बिपिन रावत के बयान पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि देश का पहला सेना प्रमुख है जो भाजपा के लिए वोट मांग रहा है। वोट मांगने का काम नेताओं को करना चाहिए। सामरिक सुरक्षा का काम है सेना प्रमुख का। आज केंद्र सरकार हमारी सारी व्यवस्थाओं पर चाबुक लगाकर गलत काम करवा रही है। केंद्र सरकार के चार वर्ष का ब्यौरा रखते हुए श्री अंजान ने कहा कि किसी भी बिंदु पर यह सरकार सफल नहीं है। केवल झूठ के बल पर यह सरकार चलाई जा रही है। सम्मेलन में प्रदेश सचिव डॉ. गिरीश शर्मा, सह सचिव पूर्व विधायक इम्तियाज अहमद, जिला सचिव अमेरिका सिंह यादव, पूर्व ब्लाक प्रमुख रामायण यादव, कैलाश सिंह, सुरेंद्र राम, किसान सभा के प्रदेश सचिव पूर्व विधायक राजेंद्र यादव, रामनारायण सिंह, गुफरान अहमद, इकबाल अहमद, रामलाल, राम शुक्ला, रामपरीखा यादव, बच्चेलाल, राम अवध, प्रेमचंद्र पाल ने विचार व्यक्त किया। अध्यक्षता शमीम अहमद तथा संचालन जनार्दन राम ने किया।
भाकपा के सम्मेलन के माध्यम से पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजान ने ईवीएम पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में हुए नगर निकाय के चुनाव में जहां पर ईवीएम के द्वारा वोट पड़े वहां पर भाजपा क्यों जीती और जहां पर बैलेट पेपर से चुनाव हुए वहां पर भाजपा पूरी तरह से कैसे हार गई। यह काफी गंभीर सवाल है। इस पर पूरे देश में मंथन चल रहा है। जनता को फैसला लेना होगा कि वोट ईवीएम से हो या बैलेट पेपर से।
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