गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक माह करीब 12 लाख खर्च हो रहा है। वॉकी-टॉकी से लेकर पिस्टल व बंदूक से सुरक्षाकर्मी लैस हैं, बावजूद चोरी की घटनाएं हो रही हैं। 91 सीसीटीवी कैमरों से अस्पतालों की निगरानी के अलावा 36 सुरक्षाकर्मी व सुपरवाइजर तैनात हैं।
पूर्व में जिला अस्पताल जब-तक मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध नहीं हुआ था, वहां एक पुलिस चौकी स्थापित थी। यहीं नहीं उस दौरान चौकी में सुबह से लेकर रात तक पुलिस कर्मियों की तैनाती भी रहती थी। मेडिकल कॉलेज के स्थापित होने के बाद जैसे ही अस्पताल संबंद्ध हुआ, यहां की सुरक्षा को लेकर मेडिकल कालेज प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी। ऐसे में मेडिकल कॉलेज, 200 बेड के पुरुष अस्पताल, 300 बेड के नवनिर्मित अस्पताल और 100 बेड के महिला अस्पताल में सेवानिवृत्त आर्मी जवानों को सुरक्षा कर्मी के रूप में तैनात किया गया। बावजूद घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इन घटनाओं पर नजर रखने के बजाए सुरक्षा कर्मी आए दिन मरीजों एवं तीमारदारों से कहासुनी करने में लगे रहते हैं। कभी-कभी तो वाहन खड़ा करने पर धौंस दिखाने के साथ मारपीट तक उतारू हो जाते हैं, लेकिन चोरी जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने में विफल हो चुके हैं।
सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। दस सुरक्षा कर्मी पिस्टल व बंदूक रख सकते हैं। चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने का प्रयास कर्मियों द्वारा किया जा रहा है।- प्रोफेसर आनंद मिश्रा, प्राचार्य, महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कालेज
केस 1-शादियाबाद निवासी योगेंद्र कुमार 15 जुलाई की दोपहर 12 बजे अपनी बेटी का इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचे। इलाज के बाद दवा लेकर जब बाहर आया देखा कि बाइक चोरी हो गई। काफी ढूंढा, लेकिन बाइक नहीं मिली।
केस 2-मुहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के बरेजपुर निवासी संतोष कुमार 13 जुलाई को जिला अस्पताल आए। दोपहर 2 बजे करीब अपनी बाइक खड़ी करके अस्पताल में भर्ती बहन से मिलने गए। वापस शाम सात बजे लौटे तो इमर्जेंसी वार्ड के बगल पार्किंग में खड़ी बाइक गायब थी।
केस 3-मुहम्मदाबाद वार्ड नंबर सात निवासी और राहुल राय जिला अस्पताल में तैनात हैं। 13 जुलाई को दोपहर में बाइक चोरी होने के बाद हो हल्ला मचा तो ये भी अपनी बाइक को देखने गए। इनकी भी बाइक चोरी हो चुकी थी।
केस 4-नंदगंज थाना क्षेत्र के कुसुम्ही कला निवासी आनंद प्रकाश 12 जुलाई को अपने भाई का इलाज कराने जिला अस्पताल आए थे। लाइन में लगकर पर्ची बनवाने के लिए खड़े थे। सुबह करीब 10.30 बजे जेब से एक महिला ने 6000 रुपये निकाल लिया। हालांकि उन्होंने तत्काल उस महिला को पकड़ लिया और चोरी हुए रुपये बरामद कर लिए।