सुबास सोनकर की तहरीर के मुताबिक 27 दिसंबर 2024 को दोपहर 12:30 बजे रेयाज अंसारी के घर की तरफ जा रहा था। रेयाज अंसारी काला चश्मा पहनकर व शॉल ओढ़कर पत्नी निकहत के साथ कुर्सी लगाकर मकसूद अली के घर के सामने अपने फार्म हाउस की गली रोड पर बैठे थे। मैंने जमीन लौटाने की बात कही। इसी बीच उनका भतीजा शकील और साला कमाल अहमद भी आ गए और सभी मेरे साथ बदसलूकी करने लगे। बोले, तुम्हे व तुम्हारे परिवार को इस धरती पर नहीं रहना है क्या।
पीड़ित के मुताबिक घटना के समय रेयाज अंसारी के भतीजे शकील अख्तर और उनके साले कमाल अहमद ने उसे धक्का दिया था। कहा था कि जमीन तो वापस नहीं होगी, जान बचानी है तो यहां से चले जाओ। जैसे अभी तक शांत रहे, शांत रहो। पुलिस-थाना करने की सोचना मत।
पीड़ित ने दावा किया है 27 दिसंबर 2024 की घटना के समय शोर सुनकर मौके पर मेरे दोनों भाई कन्हैया सोनकर व रमेश सोनकर भी आए और आसपास के लोगों ने भी बीचबचाव किय। तब से मैं उन लोगों के डर के मारे छिपकर रह रहा था। जब पुलिस ने रेयाज अहमद अंसारी को जेल भेजा तो मुझे विश्वास हो गया कि मेरे प्रार्थना पत्र पर न्याय मिलेगा। इसी आधार पर थाने में तहरीर दी।