गाजीपुर। प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक डा. नामवर सिंह के निधन पर शोक सभा व्यक्त किए जाने का सिलसिला जारी है। उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने हिंदी आलोचना को एक नई दिशा दी है।
शहर के तुलसी सागर स्थित वरिष्ठ कवि दिनेश चंद्र शर्मा के आवास पर शनिवार को आयोजित शोक सभा में दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि दी गई। श्री शर्मा ने कहा कि नामवर सिंह हिंदी की विधा आलोचना और समीक्षा के क्षेत्र में सशक्त हस्ताक्षर थे। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया। वीके सिंह ने कहा कि उनमें हिंदी की कई विधाओं की झलक मिलती थी। इस मौके पर ओएन प्रधान, अशोक कुमार गुप्ता, मनीष तिवारी, हृदयनारायण आदि मौजूद रहे। इसी क्रम में रामचरित उपाध्याय स्मृति संस्थान में आयोजित शोक सभा में वरिष्ठ साहित्यकार डा. जितेन्द्र नाथ पाठक ने कहा कि हिंदी समीक्षा में द्वंदात्मक ऐतिहासिक भौतिकवाद के आधार पर अपभ्रंश काव्य से लेकर आधुनिक साहित्य की समीक्षा कर के आलोचना विधा को एक नया आयाम दिया। छायावाद, रहस्यवाद, प्रगतिवाद आदि सभी पर इनका एक नजरिया रहा है। डा. माधांता राय ने हिंदी आलोचना के विकास पर दृष्टिपात करते हुए कहा कि छायावादी कविता पर अंतर्मुखता आदि के आरोप को सबसे पहले नंददुलारे वाजपेई ने उसे समय से जोड़ते हुए शुक्ल जी का खंडन किया था। नामवर जी ने प्रगतिशील दृष्टि से अपने समय से जोड़ दिया। रामवतार ने उन्हें प्रखर पत्रकार बताते हुए जनयुग और आलोचना के संपादन कला पर प्रकाश डाला। इस मौके पर डा. अबिका पांडेय, डा. गंगेश, एसएन मिश्रा, डा. रमाशंकर सिंह, डा. विक्रमादित्य मिश्र, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, सियाराम शरण वर्मा, प्रमोद राय, उदय प्रताप पांडेय आदि मौजूद रहे।