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जिले भर में बह रही धार्मिक बयार

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गाजीपुर। अति महत्वपूर्ण कार्तिक मास में जिले भर में धार्मिक कार्यों तथा प्रवचनों की बयार बह रही है। कहीं भागवत पुराण चल रहा है, तो कहीं रामकथा में भक्तों को अमृतपान कराया जा रहा है। इससे वातावरण भक्तिमय तथा सौहार्दपूर्ण बना हुआ है।
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शहर के ठाकुरद्वारा में आयोजित संत प्रवचन कार्यक्रम में हरिद्वार से पधारे स्वामी अनंतदेव जी ने कहा कि सभी महीनों में कार्तिक मास भगवान विष्णुजी का सबसे प्रिय मास है। इस मास में नियम से स्नान और व्रत करने वालों के सभी पाप काट जाते हैं। आंवले के वृक्ष की पूजा करने के साथ ही कथा श्रवण का विशेष फल मिलता है। उन्होंने कार्तिक मास के महात्म्य की चर्चा करते हुए कहा कि यह महात्म्य सुनने से भी पापों का नाश हो जाता है। कार्तिक मास में संत, गृहस्थ आदि को अलग अलग स्नान फल बताया गया है। ब्रह्म मुहुर्त में स्नान के बाद आंवले की विधि विधान से पूजा और भजन कीर्तन किया जाना चाहिए। विधि विधान से इस नियम का पालन करने से सिर्फ इस एक माह में ही मानव के समस्त पापों का नाश हो जाता है। इस मौके पर सुशीला पांडेय, पूजा, बिंदुमती, यश प्रकाश, ईशानी, प्रदीप कुमार, निर्मला आदि मौजूद रहे। अंत में दमयंती पांडेय ने आरती किया। शिवांशु तथा लकी ने प्रसाद वितरित किया।
इसी प्रकार मतसा संवाददाता के अनुसार राम जानकी मंदिर गरुआ मकसूदपुर के प्रांगण में चल रहे भागवत कथा में संत शिव रामदास फलाहारी बाबा ने कहा कि वर्णन की दृष्टि से श्रीमद्भागवत को चार प्रकार से विभाजित किया जा सकता है। घटनात्मक, उपदेशात्मक, अस्तुत्यात्मक और गीतात्मक। भागवत की कथा केवल श्रवण मात्र से ही जीव का उद्धार कर देती है बशर्ते श्रोता समर्पित हो तथा शरणागति के घाट पर बैठकर कथा सुने। इस कथा निमित्त बाबा के नेतृत्व में कलश यात्रा निकाली गई। इसी क्रम में क्षेत्र के हनुमंत लाल जूनियर हाईस्कूल डुहियां में श्रीरामकथा के दूसरे दिन पंडित गोविंद शास्त्री ने कहा कि कर्म ही से मनुष्य महान भी बनता है। सबसे उत्तम गति जटायु को मिली है। इसके लिए देवता भी तरसते है। जीवों का मांस खाने वाले गिद्धराज जटायु ने रावण द्वारा हरण कर ले जाती हुई अबला सीता की रक्षा के लिए जब अपना जीवन भी दांव पर लगा दिया तो उसको भगवान का धाम और स्वरूप दोनों प्राप्त हुआ। उसके प्राण भगवान की बाहों में निकला जो सौभाग्य फिर किसी को नहीं मिला। संचालन संजय ने किया।
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