मुहम्मदाबाद(गाजीपुर)। देश को आजाद कराने के लिए नौ अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के अंग्रेजों भारत छोड़ो के आह्वान पर देशभर में क्रांति शुरू हुई थी। 18 अगस्त 1942 को मुहम्मदाबाद तहसील भवन पर तिरंगा फहराते हुए अंग्रेजों की गोली के शिकार हुए डा. शिवपूजन राय के नेतृत्व में शेरपुर के आठ नौजवान शहीद हो गए थे। इन अष्ट शहीदों की याद में बना शहीद पार्क एवं शहीद स्मृति भवन आज भी उपेक्षित पड़ा है। अब सेनानी के वंशज के हाथ में ही शहीद पार्क के देख रेख की जिम्मेदारी है, जो अल्प संसाधनों में इसे संचालित कर रहे हैं।
अगस्त क्रांति के इतिहास में मुहम्मदाबाद की क्रांति स्वर्ण अक्षरों में अंकित की जाने वाली क्रांति थी। इसमे शेरपुर के आठ नौजवानों डा. शिवपूजन राय, वंशनारायण राय, नारायण राय, राजनारायण राय, ऋृषेश्वर राय, रामबदन उपाध्याय, वंशनारायण राय द्वितीय एवं वशिष्ठ राय एक एक कर शहीद हो गए। इन शहीदों की याद में बना शहीद पार्क एवं शहीद स्मृति भवन अब पूरी तरह उपेक्षित पड़ा है। शहीद पार्क गंदगी के अंबार के साथ ही छुट्टा पशुओं का चारागाह बना हुआ है। शहीदों की याद में उनके शहादत दिवस पर 18 अगस्त को प्रतिवर्ष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन होता है। उसमें आए नेताओं और अधिकारी शहीद पार्क के सुंदरीकरण की चर्चा जोरशोर से करते हैं लेकिन शहादत के 76 साल बाद भी शहीदों के रक्त से रंजित शहीद स्मृति भवन एवं शहीद पार्क पूरी तरह उपेक्षित पड़ा है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सूर्यनारायण राय के पुत्र एवं शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष अभय नारायण राय ने कहा कि शहीद पार्क का सुंदरीकरण कराये जाने एवं शहीद स्मृति भवन की मरम्मत के लिए शासन स्तर एवं जनप्रतिनिधियों से कई बार प्रयास किया गया। इसके लिए जनप्रतिनिधियों ने अपनी निधि से धनराशि भी मुहैया कराई लेकिन सरकारी विभागों एवं ठेकेदारों ने उक्त धनराशि की बंदरबांट कर ली। इस कारण शहीद पार्क, शहीद स्तंभ एवं शहीद स्मृति भवन का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। शहीद स्मारक समिति अपने संसाधन एवं जनता के सहयोग से जितना संभव हो सकता है शहीद पार्क को ठीक रखने पर खर्च करती है। प्रति वर्ष 18 अगस्त को शहीद स्मृति भवन का रंग-रोगन करा कर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन करती है। श्री राय ने कहा कि शहीद पार्क के लिए जो भी धनराशि सरकारी विभाग को दी जाती है तो उसका निर्माण शहीद स्मारक समिति की निगरानी में एवं उसका भुगतान समिति के संतुष्टि प्रमाण पत्र देने पर किया जाता तो सरकारी धन की बंदरबांट नहीं होती। शहीदों की गरिमा के अनुरूप शहीद पार्क का सुंदरीकरण भी हो जाता। उपजिलाधिकारी रमेश यादव ने कहा कि शहीद पार्क के सुंदरीकरण के लिए कोई सरकारी फंड नहीं है। नगरपालिका परिषद मुहम्मदाबाद को इसकी साफ सफाई की जिम्मेदारी दी गई है।