बहरियाबाद(गाजीपुर)। अपने दामन में अल्लाह की बे-पनाह अजमतों, मसर्रतों, बरकतों एवं रहमतों को समेटे यह पाकीजा महीना पहले अशरे की दहलीज पार कर दूसरे अशरे में प्रवेश केर चुका है। दूसरे अशरे में कई आसमानी किताबें नाजिल र्हुइं। इबादत-ओ-रेयाजत का सिलसिला जारी है। रमजानुल मुबारक के मुकद्दस महीने में पाक एवं मुकद्दस किताब कुरआन नाजिल (अवतरित) हुई। कुरआन पाक से पहले भी कई आसमानी किताबें माहे रमजान में ही उतरीं।
अन्य इबादतों की तरह माहे रमजान में तिलावते कुरआन पाक का भी खास मर्तबा है। कुरआन पाक अल्लाह का कलाम है। रसूले-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि तुम कुरआन पढ़ा करो, तुमको हर हर्फ के एवज में दस नेकियों का सवाब मिलेगा। कहा गया है कि तिलावते-कुरआन माहे रमजान की जीनत है। हजरत अब्बास रजि से रवायत है कि रमजान के महीने के अंदर शबे-कद्र में पूरा कुरआन लौहे-महफूज से उतरा था और आसमाने दुनिया में बैतुल इज्जत में रख दिया गया था। फिर थोड़ा-थोड़ा 23 साल में हजरत जिब्रईल अलैहिस्सलाम के जरिए रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर उतरा। हजरत शाबी रहमतुल्लाहि अलैह से रवायत है कि कुरआन वर्षों में नाजिल हुआ। अलबत्ता जिब्रईल अलैहिस्सलाम हुजूरे-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने पूरा कुर्आन दोहराते थे। उसमें से अल्लाह को जिस कद्र और जितना मंजूर होता, बरकरार रखता और जितना मंसूब करना होता वह रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरामोश कर देते। शहाब बिन तारिक रहमतुल्लाहि अलैह का बयान है कि अबूजर गफ्फारी से रवायत है कि पूर्व में हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम पर माहे रमजान की तीन रातों में सहीफे नाजिल हुए और हजरत मूसा अलैहिस्सलाम पर तौरेत माहे रमजान की जुमा की रातों में नाजिल हुई। हजरत दाऊद अलैहिस्सलाम पर ऽजबूरऽ माहे रमजान की अठारहवीं रात को उतरी। हजरत ईसा अलैहिस्सलाम पर इंजील माहे रमजान की तेरह को नाजिल (अवतरित) हुई और रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर कुर्आन मजीद रमजानुल-मुबारक की चौदहवीं तारीख को नाजिल हुआ।