गाजीपुर। सत्र न्यायाधीश जीके पांडेय की अदालत ने मंगलवार को तीन वर्ष पूर्व शादियाबाद थाना क्षेत्र के बरईपारा गांव में हुई हत्या के मामले में दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर छह-छह माह के अतिरिक्त कारावास का आदेश अदालत ने दिया है।
शादियाबाद थाना क्षेत्र के बरईपारा गांव निवासी नागेंद्र सिंह यादव ने 21 मई, 2014 को दोपहर दो बजे थाने में तहरीर दी थी कि 20 मई की रात 11 बजे अपने बड़े भाई प्रहलाद यादव के साथ रोज की तरह घर के बाहर दो चारपाई पर मच्छरदानी लगाकर सोए हुए थे। अज्ञात लोगों द्वारा बड़े भाई प्रहलाद यादव को जान से मारने की नीयत से मच्छरदानी पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई। जब मच्छरदानी जलने लगी तो बड़े भाई चीखने-चिल्लाने लगे। आवाज सुनकर जब नागेंद्र की नींद टूटी तो देखा कि उसके बड़े भाई प्रहलाद यादव मच्छरदानी सहित जल रहे थे। आसपास के लोगों ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह से आग बुझाई। इस घटना में बड़े भाई का पूरा शरीर जल गया था। इलाज वाराणसी के निजी अस्पताल में चला। तहरीर के आधार पर अज्ञात लोगों के विरुद्ध धारा 326 भादवि के तहत पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। 25 मई 2014 को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु अस्पताल में हो गई। पुलिस द्वारा दर्ज रिपोर्ट को धारा 302 में तब्दील कर दिया। विवेचना के दौरान मृतक की पत्नी विमला देवी ने पुलिस कार्यालय में प्रार्थना पत्र दिया कि गांव के ही सुनील यादव पुत्र गामा यादव और हंसराजपुर निवासी नंदलाल यादव पुत्र रमेश यादव उर्फ भोभल लड़कियों से छेड़खानी करते थे। पति प्रहलाद यादव ने इस कृत्य को देख लिया था और उन्होंने ऐसा करने से मना किया था। इस पर दोनों अभियुक्तों ने उन्हें देख लेने की धमकी दी थी। गांव के जानकी पत्नी सुफेर और रामा पुत्र सीरी ने घटना के समय दोनों अभियुक्तों को भागते हुए देखा था। मृतक की पत्नी के द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर पुलिस द्वारा की गई विवेचना में प्रहलाद हत्या के मामले में सुनील यादव और नंदलाल यादव को आरोपी बनाते हुए आरोप सत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। विचारण के दौरान सत्र न्यायालय में कुल 11 गवाहों की गवाही प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता कुमारी मलिका बेगम ने कराई। गवाहों ने घटना का समर्थन किया। अदालत ने अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद सुनील यादव और नंदलाल यादव को बीते 28 अगस्त को धारा 302/34 भादवि के तहत दोष सिद्ध पाते हुए सजा की बिंदु पर सुनवाई के बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई।