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पतंग की दुकानों पर लग रही बच्चों की भीड़

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गाजीपुर। जैसे-जैसे मकर संक्रांति का पर्व करीब आता जा रहा है, वैसे-वैसे फिजां में भक्काटा की आवाज भी गूंजने लगी है। आसमान में छोटा भीम और स्पाइडर मैन के चित्रों वाली पतंगे पेंच लड़ा रही हैं। इनमें से किसी एक के कट कर लहराने के बाद इनमे पीछे दीवाने बच्चों की भीड़ दौड़ पड़ रही है। शहर के विभिन्न मुहल्लों में लगे पतंग की दुकानों पर बच्चों की कौन कहे, बड़े भी खरीददारी के लिए पहुंच रहे हैं। इस दौरान उनकी ओर से पतंग और मंझे की खरीददारी की जा रही है। पीएम मोदी और सीएम योगी की तस्वीर छपी पतंग की मांग अधिक है।
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सूर्य उदय होने से सूर्य ढलने तक बच्चे सहित बड़े पतंगों की पेंच लड़ा रहे हैं। वैसे तो पतंगबाजी के शौकीन 12 माह इसका आनंद लेते हैं, लेकिन मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का विशेष महत्व है। इस मौके पर बच्चों के साथ ही बड़े भी पतंगबाजी का आनंद लेेते हैं। 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाने की परपंरा है। जैसे-जैसे पर्व नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे शहर के मुहल्लों में स्थायी और अस्थायी पतंग की दुकानें सजनी शुरू हो गई हैं। इन दुकानों पर एक से बढ़ कर एक पतंगों के साथ ही परेता और विभिन्न किस्म की मंझे उपलब्ध कराए गए हैं। आलम यह है कि दुकान खुलते ही बच्चे पहुंच जा रहे हैं और पतंगों सहित मंझा की खरीददारी कर रहे हैं। सुबह से ही घरों की छतों और मैदानों में बच्चों की कौन कहे, बड़े-बुजुर्ग भी रंग-बिरंगी पतंगों को आसमान में उड़ा रहे हैं। इसके बाद पेंच लड़ाने का जो क्रम शुरु हो रहा है, वह सूर्य ढलने तक जारी रहा है। पूरे दिन आसमान में रंग-बिरंगी पतंगे पेंच लड़ाती नजर आ रही हैं। इस दौरान जैसे ही कोई पतंग कट रही है, वैसे ही नीचे खड़े बच्चे उसे अपना बनाने के लिए उसके पीछे दौड़ जा रहे हैं। बच्चे पतंग उड़ाने में इस कदर मशगूल हो जा रहे हैं कि उन्हें खाने-पीने का भी ध्यान नहीं रह रहा है। खोवा मंडी में स्थित दुकानदार विवेकानंद ने बताया कि पीएम मोदी, सीएम योगी, छोटा भीम, स्पाइडर मैन, तिरंगा, वर्ष 2019 के साथ विभिन्न हीरो-हेरोइन की तस्वीर छपी पतंग ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराया गया है। सबसे अधिक बिक्री पीएम मोदी और सीएम योगी की तस्वीर छपी पतंग की हो रही है। बताया कि दो से लेकर 10 रुपये में पतंग और 10 से लेकर 20 रुपये में मंझा की बिक्री की जा रही है। बताया कि जिले में खासकर मकर संक्रांति पर जिले में लाखों का कारोबार होता है।
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दूसरे जिलों में चाइनीज मंझा से हादसे होते रहे हैं, लेकिन इस जिले में अभी तक ऐसी कोई दुर्घटना नहीं हुई है। हादसों को देखते हुए प्रशासन ने चाइनीज मंझा की बिक्री को करीब दो वर्ष पहले प्रतिबंधित कर दिया है। इससे दुकानदारों में हड़कंप मच गया था। पुलिस की चेकिंग के कोई कार्रवाई न हो जाए, इस आशंका के मद्देनजर दुकानदारों ने चाइनीज मंझों को दुकानों से हटा दिया था और स्टाक निकालने के लिए चोरी-छिपे इसकी बिक्री शुरू कर दिया था। हालांकि वर्तमान समय में अधिकांश दुकानदारों ने इसकी बिक्री पूरी तरह से बंद कर दिया है। गिने-चुने दुकानदार, जिनके पास पहले से मंझा बचा हुआ है, वह इसकी चोरी-छिपे बिक्री कर रहे हैं।
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