गाजीपुर। जिला मुख्यालय स्थित जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र पर सोमवार को प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दूरदराज से आने वाले दिव्यांगों को काफी मायूस होना पड़ा। यहां तैनात किए गए चिकित्सक सही समय से नहीं आते। विकलांग और उनके तीमारदार उनका घंटों इंतजार करते हैं। इस कारण उनका प्रमाण पत्र नहीं बन पाता। आज भी 50 से अधिक दिव्यांग प्रमाणपत्र न बनने के कारण निराश हो वापस हो गए। इसकी शिकायत मिलने के बाद भी आला अफसर चुप्पी साधे हुए हैं।
सीएमओ कार्यालय के पास हर सोमवार को जिलेभर के दूर दराज से विकलांग आते हैं। यहां कुछ को नया प्रमाण पत्र जारी कराना होता है, तो किसी को पुराने प्रमाण पत्र को रिन्युवल करना होता है। इस काम के लिए उनकी तीन स्तरों पर जांच होती है। जांच के बाद चिकित्सकों की रिपोर्ट के आधार पर प्रमाणपत्र बनाया जाता है। इसके लिए एक-एक फिजीशियन, हड्डी, आंख, नाक-कान-गला के चिकित्सक की ड्यूटी लगाई जाती है। दिव्यांग तो इस कार्यालय पर सात बजे से ही आकर लाइन लगा लेते हैं, लेकिन उन्हें तब मायूसी का सामना करना पड़ता है जब देर तक इंतजार के बाद उक्त चिकित्सक नहीं आते। आज भी काफी इंतजार के बाद भी जब डॉक्टर नहीं पहुंचते तब सभी मायूस हो कर वापस हो गए। जखनियां के सोनहरा से आए दिव्यांग ने बताया कि उन्हें आने-जाने में कितनी परेशानी होती है, इसका अंदाजा उन्हें देख कर लगाया जा सकता है। दूर से आने के बाद जब यहां पता चलता है कि चिकित्सक नहीं आए हैं तो मन मसोस कर रह जाता है। दिलदारनगर के मुन्ना गुप्ता ने कहा कि यह दूसरी बार है जब किसी न किसी कमी के कारण उन्हें बिना प्रमाणपत्र के ही लौटना पड़ रहा है। इसी प्रकार ज्ञानेंद्र प्रसाद, रणजीत कुमार, महुरिया से राजेश कुमार आदि को बैरंग लौटना पड़ा।