गहमर (गाजीपुर)। नहाय-खाय के साथ लोक आस्था का चार दिवसीय चैती छठ पर्व बुधवार से शुरू हो गया। सैनिकों के गांव गहमर में ज्यादातर महिलाओं ने व्रत रखा। शुक्रवार की शाम गंगा घाटों पर व्रती महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी। शनिवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का समापन करेंगी। पर्व को लेकर व्रती महिलाओं के साथ ही उनके परिवार में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है।
व्रत की चली आ रही परंपराओं के अनुसार नहाय-खाय का अनुष्ठान बुधवार को पूरा होने के बाद गुरुवार को पूरे दिन उपवास रखने वाली महिलाओं ने शाम को गुड़ और चावल से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण कर खरना का व्रत किया। अगले दिन शुक्रवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगी। खरना के प्रसाद का भी विशेष महत्व होता है। इस प्रसाद को सगे-संबंधियों के बीच वितरित करने की परंपरा है। महंथ आकाश राज तिवारी ने बताया कि नहाय-खाय व्रत की शुद्धता का प्रतीक है। लिहाजा श्रद्धालु भगवान भाष्कर को अर्घ्य अर्पित के पूर्व व्रत का अनुष्ठान नहाय खाय के साथ शुरू करते हैं। बताया कि इस बार चैती छठ के अंतर्गत बुधवार को नहाय- खाय तथा गुरुवार को खरना के बाद शुक्रवार को अस्ताचल गामी भगवान सूर्य के डूबते स्वरूप को व्रत का पहला अर्घ्य दिया जाएगा। शनिवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के बाद पारण के साथ व्रत का समापन किया जाएगा। मान्यताओं के अनुसार नहाय-खाय के दिन शाम को लौकी की सब्जी एवं चना दाल के साथ अरवा चावल से बना प्रसाद खाने की परंपरा है। खास बात यह है कि इसे तैयार करने के लिए मिट्टी के बने चूल्हे के अलावा उसमें आम की लकड़ी ही जलावन के रूप में प्रयोग की जाती है। व्रत के एक-एक चरण के प्रसाद का विशेष महत्व होता है। क्षेत्र में अमूमन चैती छठ करने वाली व्रतियों की तादाद कम ही हुआ करती है, लेकिन धीरे-धीरे इस पर्व में भी आस्था रखने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को पड़ने वाले पहले अर्घ्य को देखते हुए गुरुवार को ही प्रधान प्रतिनिधि ने गांव के नरवाघाट घाट का निरीक्षण कर घाटों की सफाई एवं रोशनी के उचित प्रबंध कराया।