गाजीपुर। कोरोना संकट काल के दौरान एक तरफ जहां स्वास्थ्य महकमा सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों में भी बेडों को सुरक्षित करने में जुटा था। वहीं रेलवे महकमा भी अपने निजी संसाधनों के जरिए कोचों को आइसोलेशन वार्ड में परिवर्तित कर सहयोग करने में जुटा हुआ था। जनपद के सिटी रेलवे स्टेशन पर भी 11 कोच लगाए थे, जो वर्तमान समय में वाशिंगपीट पर खड़ी हैं। हालांकि पहली, दूसरी लहर और तीसरी लहर के दौरान आइसोलेशन कोच की आवश्यकता नहीं पड़ी थी।
कोरोना के पहली लहर में संक्रमित मरीजों के मिलने का जब क्रम शुरू हुआ तो स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों को एलवन अस्पताल बनाना शुरू कर दिया था। संक्रमितों के आंकड़ों में हो रही वृद्धि और बेड में आ रही कमी को देखते ही रेलवे द्वारा जनपद के लिए 11 कोच को आइसोलेशन कोच में परिवर्तित कर मुहैया कराया गया था। हालांकि धीरे-धीरे संक्रमित मरीजों में कमी आनी शुरू हो गई थी। इसके बाद दूसरी लहर के दौरान भी संक्रमण की भयावहता को देखते हुए आइसोलेशन कोच पुन: सिटी रेलवे स्टेशन पर लाकर खड़ी कर दी गई थी। उस दौरान भी आइसोलेशन कोच में एक भी मरीज भर्ती नहीं थे। तीसरी लहर का प्रभाव ज्यादा नहीं रहा, लेकिन रेलवे अपने तरफ से एहतियात बरतने के साथ जिले स्वास्थ्य विभाग के साथ अपने संसाधनों के साथ खड़ा दिखाई पड़ा। वर्तमान समय 11 आइसोलेशन कोच वाशिंगपीट पर खड़ी हैं। देखा जाए तो दो वर्ष से कोच का प्रयोग नहीं हुआ है। इस संबंध वाराणसी मंडल के पीआरओ अशोक कुमार ने बताया कि 11 आइसोलेशन कोच गाजीपुर को उपलब्ध कराए गए थे। खर्च की जहां तक बात है तो रेलवे द्वारा अपने उपलब्ध संसाधनों के आधार पर कोच में मरीजों के भर्ती करने और उनके उपचार की व्यवस्था की गई थी। इन कोचों को प्रयोग में लाने के लिए सरकार और रेलवे बोर्ड के तरफ से कोई दिशा- निर्देश नहीं आया है।