फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ghazipur News: 102 अनफिट वाहनों से ढाेये जा रहे बच्चे

विज्ञापन
शहर के ददरीघाट मार्ग पर ऑटो में भरकर जाते स्कूली बच्चें। संवाद
विज्ञापन
गाजीपुर। जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर न तो जिम्मेदार विभाग गंभीर दिख रहा है और न ही स्कूल संचालक। अभिभावन भी इसका ध्यान नहीं दे रहे हैं। परिवहन विभाग की जांच में जिले में 102 स्कूली वाहन ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जो बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के सड़कों पर दौड़ रहे हैं और इन्हीं से बच्चों को रोजाना लाने-ले जाने का काम हो रहा है।
विज्ञापन

प्रशासन के बार-बार निर्देश और जागरूकता अभियान के बावजूद अभिभावक भी बच्चों को टेंपो और ई-रिक्शा से स्कूल भेज रहे हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में करीब 1113 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इनमें 102 वाहन बिना फिटनेस के चल रहे हैं। इसके अलावा कई वाहन ऐसे भी सामने आए हैं, जो स्कूलों से संबद्ध तो हैं, लेकिन उनके कागजात अधूरे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि कई जगहों पर बच्चे टेंपो और ई-रिक्शा में बैठकर स्कूल जाते दिख रहे हैं, जिनमें सुरक्षा मानक न के बराबर हैं।
फिटनेस में किन बिंदुओं की होती है जांच : परिवहन विभाग की ओर से फिटनेस के दौरान वाहन की स्थिति, रेडियम पट्टी, ब्रेक सिस्टम, स्टेयरिंग, हेडलाइट, इंडिकेटर, इंजन की आवाज, इंजन-चेसिस नंबर, बैक लाइट, फॉग लाइट समेत कई तकनीकी बिंदुओं की जांच होती है।
विज्ञापन

डीएम के निर्देश पर किया था जागरूक

पूर्व में हुई जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने निर्देश दिए थे कि स्कूल संचालकों के साथ-साथ अभिभावकों को भी जागरूक किया जाए, ताकि बच्चे ई-रिक्शा और टेंपो से स्कूल न आएं। इसके बाद परिवहन विभाग व ट्रैफिक पुलिस व शिक्षा विभाग ने अभियान चलाया था और अभिभावकों को जागरूक भी किया था और 300 अभिभावकों नोटिस दिया गया था। इसके अलावा बाइक से स्कूल आने वाले 44 बच्चों के अभिभावकों को नोटिस दिया गया था। इसके बावजूद स्थिति जस की तस है।

संचालक-प्रधानाचार्य होंगे जिम्मेदार

एआरटीओ धनवीर यादव ने बताया कि विभाग की ओर से कार्रवाई लगातार जारी है। बिना फिटनेस वाहन से हादसा होता है तो स्कूल संचालक और प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे। जो बसें बिना फिटनेस सड़क पर मिलेंगी, उन्हें मौके पर ही सीज किया जाएगा।

कचहरी तिराहा : बुधवार दोपहर करीब 2 बजे कचहरी तिराहा पर एक ऑटो में स्कूल से छुट्टी के बाद बच्चे घर जाते दिखे। ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चे बैठे थे।
महुआबाग तिराहा : दिन में करीब 2:10 बजे महुआबाग तिराहा पर एक ऑटो और एक गैर स्कूली वाहन से बच्चे जाते दिखे। दोनों वाहनों में ठूंस-ठूंस कर बच्चे बैठाए गए थे।

महुआबाग से ददरी घाट मार्ग : करीब 2:15 बजे इस मार्ग पर एक ई-रिक्शा और एक ऑटो से बच्चे घर जाते दिखे। ई-रिक्शा पर भी निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे सवार थे।

ददरी घाट : दोपहर करीब 2:20 बजे ददरी घाट में एक ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चे बैठाकर ले जाते हुए देखा गया।

स्कूल बसों के जरूरी मानक

बस पर स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा होना चाहिए।

बस की अधिकतम अवधि 15 वर्ष तय है, रंग पीना हो।

बस में बच्चों की सूची, नाम, पता, ब्लड ग्रुप और रूट नंबर होना चाहिए

चालक के साथ सहायक की तैनाती अनिवार्य हो।

शहर के ददरीघाट मार्ग पर ऑटो में भरकर जाते स्कूली बच्चें। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें