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मुकाबला हुआ त्रिकोणीय दलों ने झोंकी पूरी ताकत

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गाजीपुर। लोकसभा चुनाव में  गाजीपुर संसदीय सीट से मुकाबला त्रिकोणीय होता जा रहा है। सभी राजनीतिक  दलों के प्रत्याशी अपने-अपने वोट बैंक को साधने में पूरी ताकत झोंक दिए हैं। एक तरफ सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी और पूर्व सांसद अफजाल अंसारी तो दूसरी तरफ शिवपाल सिंह यादव की पार्टी  प्रसपा (लोहिया) के प्रत्याशी संतोष यादव चुनाव मैदान में वोट बैंक को अपने पक्ष में कर रहे हैं। प्रसपा उम्मीदवार को सियासी जंग में मजबूती देने के लिए पूर्व मंत्री शादाब फातिमा सहित अन्य दिग्गजों ने पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं भाजपा प्रत्याशी मनोज सिन्हा अपने विकास कार्यों के बूते चुनावी जंग में दमखम के साथ अड़े हैं।
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17वीं लोकसभा चुनाव में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया ने भी पूर्वांचल की कई सीटों पर जोरदार तरीके से चुनावी जंग की शुरूआत की है। गाजीपुर लोकसभा सीट पर उम्मीदवार के पक्ष में पूर्व मंत्री शादाब फातिमा के आने से कुछ मुस्लिम वोटरों का झुकाव उनकी तरफ बढ़ा है। अगर समय रहते प्रसपा मुस्लिम मतों को अपनी तरफ मोड़ने में सफल रही तो गठबंधन की गांठ कमजोर पड़ सकती है।
बड़े-बड़े दिग्गजों को चुुुनौती देने के लिए मैदान में उतरे संतोष यादव का दावा है कि वह चुनाव मैदान में एकलौते यादव हैं। उनके पक्ष में यादव और मुस्लिम वोटरों के साथ ही अन्य पिछड़ी जातियों के मतदाता भी बढ़चढ़ कर वोट करेंगे। इसके बलबूते वह हरहाल में चुनाव फतह करेंगे। श्री यादव का यह भी दावा है कि पार्टी मुखिया शिवपाल सिंह यादव के कार्यक्रम के बाद पूरा माहौल मेरे पक्ष में होगा और गठबंधन की खटिया खड़ी होगी। हालांकि गठबंधन के प्रत्याशी पूर्व सांसद अफजाल अंसारी के समर्थकों का कहना है कि प्रसपा के मैदान में आने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, यह महज चुनावी लालीपाप साबित होगा।
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देखा जाए तो गाजीपुर लोकसभा सीट पर कुल 14 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला जनपद के साढ़े 18 लाख मतदाता करेंगे। प्रमुख लड़ाकों में भाजपा से वर्तमान सांसद मनोज सिन्हा, गठबंधन से पूर्व सांसद अफजाल अंसारी, कांग्रेस से अजीत प्रताप कुशवाहा, प्रसपा से संतोष यादव, भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी से भानु प्रताप पांडेय, भाकपा माले से ईश्वरीय प्रसाद कुशवाहा समेत कुल 14 प्रत्याशी मैदान में उतरे हैं। इसमें भाजपा उम्मीदवार को दोबारा जीत कर संसद में जाना और अपनी बिरासत बचाना चुनौती है, तो गठबंधन की लाज रखना पूर्व सांसद अफजाल अंसारी के लिए प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ है। उधर कांग्रेस की खोई जमीन वापस लाना अजीत प्रताप कुशवाहा के लिए लोहे के चना चबाने के बराबर है।
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