सुहवल। हमीद सेतु में पड़ी दरार की मरम्मत का कार्य 17 वें दिन रविवार को भी पूरा नहीं हो पाया। इससे सेतु पर वाहनों का संचालन सुचारु न कराए जाने से लोगों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। तीखी धूप के बीच लोग पसीना बहाते हुए पैदल ही सेतु को पार करने को विवश हो रहे हैं। वाहनों का संचालन बंद होने से रोजगार पर भी खराब असर पड़ रहा है। दुकानदार हाथ पर हाथ धरे बैठे ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं। चार वर्ष पूर्व भरौली-बक्सर पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण उस पुल से सभी तरह के बड़े वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दिया गया था। इसके बाद गाजीपुर से होकर विभिन्न जगहों को जाने वाले वाहनों का दबाव हमीद सेतु पर काफी बढ़ गया। इसके कारण पूर्व में भी यह पुल कई बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। प्रशासन द्वारा ओवरलोड वाहनों के संचालन पर रोक लगाने का काफी प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसका नतीजा यह हुआ कि बीते आठ मार्च की सुबह हमीद सेतु के पिलर छह एवं सात के बीच के ज्वाइंटर नंबर-14 में दरार पड़ गई। जानकारी होते ही किसी दुर्घटना की आशंका से डीएम ने तत्काल बड़े चार पहिया वाहनों के संचालन पर रोक लगा दिया। मरम्मत कार्य शुरू होने पर छोटे चार पहिया वाहनों का संचालन भी प्रतिबंधित कर दिया गया। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई। 17 वें दिन भी मरम्मत कार्य पूरा न होने पर लोगों की परेशानियां बरकरार है। तेज धूप में लोगों को पसीना बहाते हुए पैदल ही सेतु को पार करना पड़ रहा है। वाहनों का संचालन बंद होने से कारोबार भी जबरदस्त रूप से प्रभावित है। होटल-ढाबा संचालक हाथ पर हाथ धरे ग्राहकों का इंतजार करते हुए प्रशासन को इस बात के लिए कोस रहे हैं कि उसकी तरफ से जल्द से जल्द मरम्मत कार्य पूरा कराने के प्रयास नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में एनएचएआई वाराणसी के परियोजना निदेशक समर बहादुर ने बताया कि मरम्मत का काम तेजी से जारी है। उम्मीद है कि जल्द इसे पूरा कर लिया जाएगा।