गाजीपुर। ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के अंतर्गत निर्मित/निर्माणाधीन पाइप पेयजल योजनाओं के अनुरक्षण एवं संचालन विषय पर जनपद स्तरीय कार्यशाला का आयोजन स्वामी सहजानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हुआ। मुख्य विकास अधिकारी हरिकेश चौरसिया ने बताया कि नीर निर्मल परियोजना के अंतर्गत प्रथम बैच में जिले के कुल 28 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया जिनमें लगभग कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा कुछ अंतिम चरण में हैं। द्वितीय चरण में कुल 122 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है।
इन ग्रामों में जन-जागरूकता के कार्य के लिए सहयोगी संगठनों का चयन किया जा चुका है। सभी सहयोगी संस्थाओं द्वारा चयनित ग्राम पंचायतों में जन-जागरूकता का कार्य किया जा रहा है। चयनित ग्राम पंचायतों में जहां जल आपूर्ति प्रारंभ हो गयी है, वहां परियोजना के संचालन एवं अनुरक्षण के लिए प्रति परिवार न्यूनतम 50 रुपये प्रति माह जल शुल्क एकत्रित किए जाने का प्राविधान है। उन्होंने बताया कि पूर्ण हो चुकी पेयजल योजनाओं का ग्राम पंचायतों की स्वच्छता समिति द्वारा योजना का संचालन एवं अनुरक्षण किया जाना है। बताया कि ग्राम पंचायतों में ओवरहैड टैंक निर्माण के लिए जमीन का चयन कर लिया गया है। ग्राम पंचायतों को हैंडओवर परियोजनाओं के सफल संचालन के लिए ग्राम पंचायतों का सहयोग नितांत आवश्यक है। सबके सहयोग से ही यह परियोजना कारगर साबित होगी। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी हरिकेश चौरसिया ने पानी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। पहले 20-25 फीट पर पीने योग्य पानी मिल जाता था। अब इसका लेवल बढकर 125-130 फीट पहुंच गया है। गंगा किनारे पर 150 फीट के नीचे ही पीने लायक पानी मिल पाता है। पानी मनुष्य जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी है। इस लिए पीने के पानी के प्रति लोगों को अधिक संवेदनशील होना होगा। उन्होंने उपस्थित ग्राम प्रधानों को गोवंश आश्रय स्थल निर्माण के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। बताया कि इसका निर्माण मनरेगा से कराया जा रहा है। भूमि के चयन की कार्रवाई हो रही है। कुछ स्थानों का चयन पूर्व में ही कर लिया गया है। कार्यशाला में नगर पालिकाध्यक्ष सरिता अग्रवाल एवं जिला विकास अधिकारी मिश्रीलाल ने नीर निर्मल परियोजना के संबंध में विचार व्यक्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।