गाजीपुर। मानव धर्म प्रसार समाज सेवी संस्था वयेपुर देवकली में चल रहे तीन दिवसीय 56वां वार्षिक सम्मेलन बुधवार को संपन्न हुआ। इस मौके पर ईश वंदना, संत प्रवचन, भजन कीर्तन आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। संतों ने श्री गंगा रामदास जी महाराज के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए मानव धर्म की प्रासंगिकता पर जोर दिया। जैतपुरा रामलीला समिति की ओर से तीन दिनों तक मन मोहक रामलीला की प्रस्तुति की गई।
मुख्य वक्ता महात्मा राजेंद्र दास बापू ने कहा कि कुछ भी बनने से पहले इंसान बने। संत गंगाराम जी का यह वाक्य सूत्र काफी व्यापक है। आज मानव सेवा से बढ़ कर कोई सेवा नहीं है। सत्य, न्याय और धर्म के बल पर ही समाज में शांति की स्थापना किया जा सकता है। लोगों को निष्ठा के साथ धर्म से जुड़ना चाहिए। कहा कि हर जीव से प्यार करना चाहिए। भगवान किसी भी रूप में हो सकते हैं। परमात्मा के ज्ञान के बगैर जीवन में मोक्ष संभव नहीं हैं। इसी क्रम में महात्मा राजेंद्र दास ने मानस को केंद्र में रखकर मानव धर्म को सबसे आवश्यक बनाया। कहा कि जब भी किसी महापुरुष का धरती पर अवतरण होता है तो उसका मुख्य उद्देश्य धर्म की स्थापना तथा समाज में शांति स्थापित करना ही होता है। संत श्री गंगा रामदास जी महाराज भी इन्हीं महापुरुषों में से थे। अन्य संत वक्ताओं ने अपने प्रवचन में जन मानस से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि जब तक लोगों में परहित की भावना नहीं आएगी, समाज की विकृतियां समाप्त नहीं हो सकती। प्रवचन करने वालों में सदानंद जी प्रभारी जमानियां, नंदलाल जी, सदर प्रभारी रामअवध जी, प्रभारी जखानियां रामानंद जी, रामजी, युवा व्यास माधव कृष्ण जी आदि शामिल रहे। इस कार्यक्रम तथा रामलीला की वजह से पूरे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना रहा। सम्मेलन के समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस मौके पर अक्षयलाल, सदानंद, रामजी, अजय, वीरेंद्र, मोहन, तेजबहादुर, योगेंद्र आदि का सराहनीय योगदान रहा। सुरक्षा के लिए पुलिस बलों की भी तैनाती की गई थी।