गाजीपुर। डाला छठ पर व्रती महिलाओं तथा श्रद्धालुओं को गंगा घाटों पर पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इस बार बाढ़ की वजह से जहां कई घाटों पर मिट्टी, बालू के बड़े-बड़े रेत पड़ जाने के कारण जहां उनका अस्तित्व ही समाप्त हो गया है, वहीं कई जगहों पर गंगा अपने असली घाट से काफी दूर बह रही है। रात के समय इन मार्गों पर प्रकाश की भी व्यवस्था नहीं की जा सकती है। सब क ुछ के बावजूद घाटों पर वेदी बनाने के लिए लोग पहुंचने लगे हैं।
जिले भर में डाला छठ का पर्व काफी धूमधाम तथा उत्साह के साथ मनाया जाता है। व्रती महिलाएं गीत गाते हुए ईख, पूजा के फल तथा सामग्रियों के साथ गंगा घाटों पर पहुंचती हैं। शाम के समय अस्ताचल और सुबह के समय उगते सूर्य को अर्घ्य दे कर इस आयोजन को पूर्ण किया जाता है। अधिकतर महिलाएं गंगा के जल में ही खड़ी रहती हैं। बाढ़ आने के बाद से इस बार खास कर ग्रामीण इलाकों में गंगा घाटों की दशा काफी दयनीय हो गई है। कही-कहीं गंगा सिमट गई हैं तो कहीं घाटों से बहुत दूर होकर बह रही हैं। शहर के ददरीघाट पर गंदगी का साम्राज्य हो गया है। बाढ़ से और भी गंदगी बढ़ गई है। कलक्टर घाट से गंगा का पानी करीब सौ मीटर दूर हो गया है। सिकंदरपुर और महादेवा घाट पर पहुंचने के लिए भी काफी चलना पड़ेगा। इसी प्रकार करंडा क्षेत्र में कटान से गंगा के घाटों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। घाट इतने खतरनाक हो गए हैं कि अरार से नीचे उतरने के लिए जगह ही नहीं है। जमानियां के सोकनी, बड़हरिया तथा अन्य तटवर्ती क्षेत्रों में घाट इतने उबड़-खाबड़ हो गए हैं कि वहां वेदी बनाने के लिए भी जगह नहीं है। मुहम्मदाबाद के बच्छलपुर, महादेवा, सेमरा, शेरपुर तथा सुल्तानपुर आदि घाटों के पास गंगा कहीं पास तो कहीं दूर हो गई है। बीच में पड़े रेत से एक बड़ा भाग बेघाट हो गया है।