गाजीपुर। लखनऊ में मिलावटी खून का धंधा उजागर होने के बाद इसको लेकर हर जगह मरीज सशंकित हैं। उन्हें सही खून मिल रहा है कि नहीं इस शंका का समाधान आसानी से नहीं हो पा रहा है। जिला अस्पताल के रक्तकोष की क्षमता करीब तीन सौ यूनिट की है। रोजाना यहां चार से पांच यूनिट रक्त मरीजों को दिया जाता है। हालांकि जिले में मिलावटी खून जैसी कोई न तो शिकायत ही है और न ही कोई मामला सामने आया है फिर भी इसको लेकर अस्पताल प्रशासन सचेत है।
रक्त कोष से मरीज तक रक्त को ले जाने तक तीमारदारों को एक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। शारीरिक मांग के अनुरूप चिकित्सक ग्रुप के अनुसार रक्त प्रेस्क्राइब करता है। इसके बाद रक्तकोष के मांग पत्र को भर कर सभी कार्रवाई पूरी करनी पड़ती है। इस पर चिकित्सक और नर्स आदि के हस्ताक्षर भी होते हैं। सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज को चार सौ रुपये जबकि निजी अस्पताल के मरीज को 1050 रुपये फीस जमा करनी पड़ती है। इसके बाद तीमारदार की ओर से रक्तदान किया जाएगा जिसके बदले में मरीज के ग्रुप का रक्त दिया जाता है। सीएमएस के विवेक पर बंदी, अनाथ आदि कुछ लोगों को निशुल्क रक्त दिया जाता है। इसी प्रकार एचआईवी के मरीज, गर्भवती महिला, हीमोफीलिया, कैंसर आदि के मरीजों को निशुल्क रक्त दिया जाता है। रक्त कोष विभाग से जुड़े साकेत सिंह ने बताया कि वर्ष भर में करीब दो हजार यूनिट तक रक्त की खपत मरीजों में होती है। इसके अलावा करीब 40 यूनिट तक रक्त अन्य प्रकार की निशुल्क सेवा में चला जाता है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एसएन प्रसाद ने बताया कि अभी जिले भर में मिलावटी खून जैसी कोई खबर या शिकायत नहीं आई है। यहां के रक्त कोष की हर समय जांच होती रहती है। हर मरीज को उपलब्धता के अनुसार रक्त देकर संतुष्ट किया जाता है।