गाजीपुर। जिले में तबाही मचा रही नदियों का रुख गुरुवार को कुछ नरम हो गया। प्रमुख नदी गंगा सुबह में स्थिर हो गईं और दोपहर से घटाव शुरू हो गया है। गोमती नदी भी दोपहर में स्थिर हो गई। कर्मनाशा नदी का भी तेवर थोड़ा ढीला पड़ा है। नदियों के ढलान के रुख के कारण गांवों और खेतों की ओर फैल रहा पानी अभी लगा हुआ है। पानी से भरे तथा घिर चुके गांवों की स्थिति अभी उसी तरह बनी हुई है। उधर तटवर्ती गांवों के निकट बाढ़ का पानी पहुंच गया था। लोगों को इस खबर के बाद थोड़ी सी राहत मिली है। जानकारों की माने तो अगर एक रात बढ़ाव की यही स्थिति बनी रही होती तो सैकड़ों गांवों में पानी घुस सकता था।
जिला प्रशासन के लोग भी बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए भ्रमणशील रहे। गाजीपुर में बहने वाली गंगा, गोमती, कर्मनाशा, गांगी, बेसो, मंगई, भैंसही, टौंस आदि का उफान थोड़ा ढीला पड़ गया है। बड़े भू भाग के प्रभावित करने वाली गंगा सुबह सात बजे स्थिर हो गई। तब नदी का जलस्तर 62.580 मीटर था। करीब दो घंटे ठहराव के बाद फिर वह लगातार घटने लगी। घटान की रफ्तार आधा सेमी प्रति घंटा बना हुआ है। दोपहर दो बजे तक गंगा का जलस्तर घट कर 62.550 मीटर पर पहुंच गया था। गंगा के खतरे का बिंदु 63.105 मीटर है। गंगा की वजह से जिले के पांच तहसीलों के सैकड़ों गांव प्रभावित होते हैं। पूर्व में हुए बढ़ाव के कारण कंरडा के बड़हरिया और रफीपुर में कटान होने लगा। मुहम्मदाबाद के सेमरा में कटान स्थल तक पानी पहुंच गया जिससे लोगों की रूह कांप गई। वर्षों पूर्व कटान में सेमरा का अस्तित्व ही आधा हो गया है। सिवराय का पुरा तथा बच्छल का पुरा तबाह होने के कगार पर पहुंच गए। अभी कई गांवों के करीब पानी पहुंचा हुआ है। केंद्रीय जल आयोग के उमाशंकर ने बताया कि अब गंगा में घटान का क्रम बने रहने की संभावना है।
औड़िहार संवाददाता के मुताबिक उधर लगातार गोमती में बढ़ाव के बाद गुरुवार की दोपहर में स्थिरता आ गई। सैदपुर तहसील क्षेत्र के कई गांव जहां पानी से घिर गए थे वहीं कुछ गांवों में पानी भी प्रवेश कर रहा था। सबसे संवेदनशील गांवों गौरी , गोरखा , गौरहट, तेतारपुर में पानी प्रवेश कर जाने से स्थिति गंभीर होती जा रही थी। लोग पलायन के मूड में आ गए थे। गुरुवार की दोपहर दो बजे से गोमती का जलस्तर 63.200 मीटर पर पहुंच कर ठहर गया। शाम तक यही हालत बनी रही। गोमती के खतरे का निशान 72.8 मीटर है। किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन जलमग्न है जिसमें लगी फसलें बेकार हो रही हैं। पानी जमा होने से सूर्यभान चक, खरौना, सिधौना आदि की स्थिति बदहाल दिख रही है। अन्य तटवर्ती लेकिन थोड़ी दूर स्थित कुशई , खरौना, अमेहता, नूरुद्दीनपुर, नेवादा , गदनपुर, वहदिया, नगरिया नाला, तेलियानी, बहुरा, भुजाड़ी आदि गांवों के लोग अब थोड़ा चिंता मुक्त दिखने लगे हैं।
जमानिया संवाददाता के अनुसार कर्मनाशा नदी की तबाही का मंजर गुरुवार को भी बना रहा। इसके जलस्तर में घटाव हो रहा है लेकिन अभी बाढ़ प्रभावित गांवों की हालत में खास सुधार नही दिख रहा है। प्रशासन भी राहत के नाम पर अभी सिर्फ जायजा ही ले रहा है। प्राथमिक स्कूल धुस्का में बनाए बाढ़ शरणालय में शरण ले रहे दर्जनों परिवारों को अभी तक कोई भी तत्काल राहत नहीं पहुंचाई गई है। बस कोरम भर पूरा किया जा रहा है। बाढ़ की चपेट में आए गायघाट और धुस्का गांव के लोग गुरुवार को भी लाचार दिखे। पानी से किसानों की धान, चरी, अरहर समेत सैकड़ों एकड़ फसल डूब गई है। तटवर्ती गांवों निपरान और गढ़वा के लोग भी संकट में है। दर्जनों परिवार सड़क पर टेंट डाल कर रह रहे हैं। हालांकि अब कर्मनाशा और गंगा के जलस्तर में हो रहे घटाव की खबर से झोड़ी राहत जरूर मिली है लेकिन स्थिति में खास सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। लोगों का मनना है कि अगर घटाव शुरु हो गया तो पानी धीरे-धीरे गांवों से निकलने लगेगा लेकिन इसमें भी एक दो नि लग जाएगा। इधर उपजिलाधिकारी विनय कुमार गुप्ता ने बताया कि वह लगातार गांवों का जायजा ले रहे है। पीडीतों के लिए बाढ़ शरणालय बना दिए गए हैं।